विदेश डेस्क, ऋषि राज
बेरूत: हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने इजराइल और लेबनान के बीच हुए ढांचे के समझौते को एक बार फिर खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईरान समर्थित संगठन न तो आत्मसमर्पण करेगा और न ही अपने हथियारों को सौंपने से जुड़ी किसी शर्त को स्वीकार करेगा। यह बयान इजराइल के साथ हमास का युद्ध शुरू होने के लगभग छह महीने बाद आया है।
हिजबुल्लाह के अल-मनार टेलीविजन पर प्रसारित एक वीडियो संदेश में नईम कासिम ने कहा कि उनका संगठन इस ढांचे के समझौते के प्रति अपने रुख पर कायम है और इसे रद्द करने की मांग करता है। उनके अनुसार, हिजबुल्लाह किसी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें संगठन के हथियारों और उसकी सैन्य क्षमता को लेकर शर्तें तय की जाएं।
उल्लेखनीय है कि दो मार्च को हिजबुल्लाह द्वारा इजराइल पर किए गए हमले के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ा था। इसके बाद शुरू हुए संघर्ष के दौरान अमेरिका की मध्यस्थता में दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई थी। हालांकि लगातार प्रयासों के बावजूद क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की चुनौती बनी हुई है।
हिजबुल्लाह प्रमुख के ताजा बयान से इजराइल-लेबनान के बीच प्रस्तावित समझौते को लेकर एक बार फिर अनिश्चितता बढ़ गई है। कासिम ने कहा कि संगठन अपनी स्थिति पर कायम रहेगा और वह उन शर्तों को स्वीकार नहीं करेगा, जिन्हें वह अपने हितों के विरुद्ध मानता है। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि वार्ता और समझौते की प्रक्रिया आसान नहीं होगी।
संघर्ष के बाद इजराइली सैन्य कार्रवाई में लेबनानी अधिकारियों के अनुसार 4,300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। लगातार जारी हिंसा ने क्षेत्र में मानवीय और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को और गंभीर बना दिया है। दोनों देशों के बीच तनाव का असर व्यापक क्षेत्रीय स्थिति पर भी पड़ रहा है।
नईम कासिम के बयान के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि इजराइल, लेबनान और मध्यस्थ देश आगे क्या कदम उठाते हैं। अमेरिका की मध्यस्थता से शुरू हुई बातचीत को फिर से आगे बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है। फिलहाल हिजबुल्लाह के स्पष्ट रुख ने युद्धविराम और संभावित समझौते की राह को और जटिल बना दिया है।






