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मुजफ्फरपुर: आधी रात 'मसीहा' बनकर उतरे SSP कांतेश मिश्रा

लोकल डेस्क, एन के सिंह।

खाकी का मानवीय चेहरा, मुजफ्फरपुर पुलिस की इस अनूठी पहल ने जीता जनता का दिल, सोशल मीडिया से लेकर गलियों तक गूँज रहा एक ही नारा— "धन्यवाद कप्तान साहब!"

मुजफ्फरपुर: पुलिस की वर्दी का नाम आते ही जेहन में सख्ती, अनुशासन और डंडे की तस्वीर उभरती है, लेकिन मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) कांतेश मिश्रा ने इस पारंपरिक धारणा को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। अपराधियों के लिए 'काल' माने जाने वाले इस आईपीएस अधिकारी ने यह साबित कर दिया है कि खाकी के सख्त लिबास के भीतर एक बेहद संवेदनशील और कोमल हृदय भी धड़कता है। होली के हुड़दंग और सुरक्षा इंतजामों के बीच, जब पूरा शहर सो रहा था, तब आधी रात को मुजफ्फरपुर की सड़कों पर खाकी 'सारथी' बनकर उभरी। एसएसपी की इस पहल ने न केवल यात्रियों के घर की राह आसान की, बल्कि पुलिस और पब्लिक के बीच विश्वास का एक नया अध्याय लिख दिया है।

सूनी सड़कों पर 'सुरक्षा कवच', निशुल्क रात्रि बस सेवा का आगाज़

शुक्रवार की रात जब बैरिया बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा पसरा था और घर जाने की आस में खड़े यात्री सवारी के लिए भटक रहे थे, तभी वहां एसएसपी कांतेश मिश्रा खुद अपनी टीम के साथ पहुंचे। उन्होंने उन बेटियों, बुजुर्गों और कामगारों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी, जिन्हें रात के अंधेरे में असुरक्षा का डर सता रहा था। एसएसपी ने जिले में 'निशुल्क रात्रि बस सेवा' की शुरुआत की है। यह महज एक वाहन सेवा नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच है, जो देर रात स्टेशन उतरने वाले मुसाफिरों को उनके घर की चौखट तक सुरक्षित पहुँचाने का जिम्मा उठा रही है। पुलिस अब केवल गश्त ही नहीं कर रही, बल्कि खुद हाथ थामकर लोगों को सुरक्षित मंजिल तक पहुँचा रही है।

अपराधियों को चेतावनी और अपनों को 'अभय दान'

एसएसपी कांतेश मिश्रा ने इस मुहिम के जरिए समाज को एक स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कड़े शब्दों में उपद्रवियों और शांति भंग करने वालों को चेतावनी दी है कि पुलिस की 'तीसरी आँख' हर चौक-चौराहों पर नजर रख रही है। वहीं दूसरी ओर, आम नागरिकों के लिए वे एक ढाल बनकर खड़े दिखे। उन्होंने कहा, "त्योहार खुशियों का नाम है और आपकी सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। रात के अंधेरे में कोई भी यात्री खुद को अकेला न समझे, मुजफ्फरपुर पुलिस हर कदम पर आपके साथ खड़ी है।" कप्तान के इस भरोसे ने उन महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के मन से डर निकाल दिया है जो रात के समय यात्रा करने से कतराते थे।

पूरे बिहार में गूँज रही है 'खाकी की ममता'

मुजफ्फरपुर पुलिस का यह 'मददगार' अवतार सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। जिले के सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि होली के दौरान शांति व्यवस्था में कोई कोताही न बरती जाए और आमजन को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। पुलिस का यह संवेदनशील व्यवहार समाज में अपनत्व और सुरक्षा का भाव पैदा कर रहा है। स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों ने भावुक होकर कहा— "धन्यवाद कप्तान साहब!" खाकी के इस नए रूप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस का काम सिर्फ कानून की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि मानवता की सेवा करना और अपनों के चेहरों पर मुस्कान लाना भी है।