विदेश डेस्क, ऋषि राज
जिनेवा: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख दोहराया है। भारत ने कहा कि आतंकवाद आज दुनिया भर में मानवाधिकारों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बन चुका है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर ठोस कार्रवाई करनी होगी।
जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र के दौरान भारत की ओर से राजदूत सीबी जॉर्ज ने परिषद को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आतंकवाद केवल किसी एक देश या क्षेत्र की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी मानवता के लिए एक बड़ा खतरा है। इसलिए इसके खिलाफ लड़ाई भी वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों के साथ ही संभव है।
भारत ने परिषद के सामने यह भी रेखांकित किया कि आतंकवादी संगठन न केवल निर्दोष लोगों की जान लेते हैं, बल्कि समाज में भय, अस्थिरता और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करते हैं। इसका सीधा असर लोगों के मौलिक अधिकारों, विकास और शांति पर पड़ता है। इसलिए आतंकवाद को मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सबसे गंभीर चुनौतियों में गिना जाना चाहिए।
राजदूत सीबी जॉर्ज ने परिषद से अपील की कि वह आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ स्पष्ट और ठोस रुख अपनाए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी प्रकार का दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए। सभी देशों को मिलकर इस वैश्विक समस्या के खिलाफ निर्णायक कदम उठाने होंगे।
भारत ने यह भी कहा कि आतंकवाद को किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित रणनीति बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने परिषद के सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे आतंकवाद के वित्तपोषण, प्रशिक्षण और समर्थन को रोकने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करें।
भारत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में आतंकवादी गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। कई देशों में आतंकी हमलों के कारण आम नागरिकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर भारत द्वारा उठाई गई यह पहल अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारत लंबे समय से आतंकवाद के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाता रहा है और लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
भारत ने परिषद में यह भी स्पष्ट किया कि मानवाधिकारों की रक्षा तभी संभव है जब दुनिया आतंकवाद जैसी गंभीर चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपट सके। इसलिए वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और मजबूत कार्रवाई बेहद जरूरी है।






