स्टेट डेस्क, रानी कुमारी |
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की चोरी के मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन शुरु करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े सवालों का स्पष्ट उत्तर मिलना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर वे उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे।
दिग्विजय ने घर के बाहर लगाए पोस्टर
दिग्विजय सिंह ने भोपाल स्थित अपने सरकारी निवास के बाहर एक पोस्टर लगाए है, जिसमें लिखा है कि चंदा चोरों का प्रवेश उनके घर में निषेध है. दिग्विजय सिंह ने यह अपील कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और आम लोगों से भी की है कि वह अपने घर के बाहर इसी तरह का पोस्टर लगाए और उसमें लिखें कि चंदा चोर उनके घर में प्रवेश न करें.
'पदयात्रा में हर दिन चलेंगे 10 से 15 किमी पैदल'
कांग्रेस नेता ने कहा, 'राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के विरोध में मैं दो अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा शुरू करूंगा। यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। इसमें किसी दल का झंडा नहीं रहेगा। भगवान राम में आस्था रखने वाले और राम मंदिर में दान देने वाले सभी लोग इसमें शामिल हो सकते हैं।' यात्रा की दूरी करीब एक हजार किलोमीटर है और वह प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।
दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने वकील से बातचीत की और कहा कि उन्होंने भी राम मंदिर के लिए दान दिया था । वे एक लाख ग्यारह हज़ार का दान दिये थे और वह दान चोरी हुआ है. इसलिए वह भी अब FIR इसे लेकर करवा सकते हैं. दिग्विजय सिंह 5 या 6 जुलाई को अयोध्या पहुंचेंगे और वहीं पर चंदा चोरी के खिलाफ मामला दर्ज करवाएंगे.
दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर देशभर के करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। यदि मंदिर परिसर में चढ़ावे या कीमती वस्तुओं की चोरी जैसी घटनाएं सामने आती हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर प्रबंधन और संबंधित संस्थाओं को इस मामले में पारदर्शिता बरतनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं के बीच किसी तरह का भ्रम न रहे।
कांग्रेस नेता ने इस दौरान भाजपा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और बहुमूल्य सामान की चोरी की बातें सामने आई हैं, उसी तरह उज्जैन में महाकाल मंदिर से जुड़ी एक बहुमूल्य जमीन को भी भाजपा शासनकाल में विवादास्पद तरीके से आवंटित किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन पटवा सरकार के समय महाकाल मंदिर के पास की कीमती भूमि एक हिंदू दक्षिणपंथी संगठन को दे दी गई थी।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि धार्मिक स्थलों और मंदिरों की संपत्तियां जनता की आस्था और विश्वास से जुड़ी होती हैं। ऐसे मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि मंदिरों की संपत्तियों और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर एक पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे भविष्य में इस तरह के विवाद पैदा न हों।







