नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के विकास की गति को कई गुना बढ़ाने के लिए सुधारों की रफ्तार तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार से लेकर समाज और उद्योग-व्यापार से लेकर खेती तक, हर क्षेत्र में पुरानी व्यवस्थाओं, सोच और लक्ष्यों में सुधार की जरूरत है।
'जो काम दशकों में नहीं हुए, उन्हें अगले 5-7 साल में करना है'
80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 5-7 दशकों में जो काम नहीं हो पाए, उन्हें आने वाले 5-7 साल में पूरा करना है। उन्होंने कहा कि उन्हें देश की युवा शक्ति, नौजवानों, माताओं-बहनों, किसानों और मजदूरों पर भरोसा है और सभी मिलकर इस सपने को पूरा कर सकते हैं।
परंपरागत व्यवस्था, सोच और लक्ष्यों में सुधार जरूरी
मोदी ने कहा कि सरकार, समाज, उद्योग, उत्पादक और किसान, सभी को अपनी पुरानी व्यवस्थाओं में सुधार करना होगा। इसके साथ ही सोच और लक्ष्यों में भी बदलाव लाना होगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ उद्योगों को भी मिलकर आगे बढ़ना होगा और सुधारों की प्रक्रिया लगातार जारी रखनी होगी।
प्रधानमंत्री ने अगली पीढ़ी के सुधारों को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत में सुधार कराना किसी मजबूरी का हिस्सा नहीं है, बल्कि सुधारों में देश का दृढ़ विश्वास है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए सुधार किए जा रहे हैं और देश 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' पर आगे बढ़ चुका है।
2047 के लक्ष्य के हिसाब से बदलनी होगी व्यवस्था
मोदी ने कहा कि सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है और अगला एक चौथाई भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अब देश न तो रुक सकता है और न ही उसकी गति रुकनी चाहिए।उन्होंने कहा कि देश की दिशा तय है और लक्ष्य हासिल करने के लिए काम की गति, सोच और कार्य संस्कृति में बदलाव जरूरी है। इसी के साथ सुधारों की गति भी बढ़ानी होगी।
पुराने नियमों से नहीं, भविष्य के सपनों के हिसाब से बनें नीतियां
प्रधानमंत्री ने देश की कंपनियों, बैंकों और ब्रांडों को वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थान दिलाने के लिए सुधारों की गति बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने राज्य सरकारों और स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं के साथ भारत सरकार से भी सुधारों की रफ्तार बढ़ाने का आह्वान किया।
मोदी ने कहा कि 2047 के लक्ष्य के अनुसार व्यवस्थाओं को विकसित करना होगा। देश पुराने दौर की नीतियों और नियमों से आगे नहीं बढ़ सकता। नीतियां आने वाले भारत के सपनों के अनुरूप बनानी होंगी। उन्होंने भरोसा जताया कि इसी दिशा में मेहनत करते हुए देश विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करेगा और इसके लिए सभी को मिलकर आगे बढ़ना होगा।







