एंटरटेनमेंट डेस्क, अर्पिता कृष्णा।
मुंबई। ‘वंदे मातरम्’ को लेकर चल रही बहस के बीच अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने वरिष्ठ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने शर्मिला के विचारों को कला और कविता के संदर्भ में सीमित बताया और उनसे इस मुद्दे को केवल हिंदू-मुस्लिम नजरिए से नहीं देखने की अपील की।
दरअसल, शर्मिला टैगोर ने हाल ही में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा था कि गीत के कुछ हिस्से उन लोगों के लिए असहज हो सकते हैं जो एक ईश्वर में विश्वास करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गीत की शुरुआती दो पंक्तियां मातृभूमि की सुंदरता और प्रकृति की बात करती हैं, इसलिए उन्हें लेकर ऐसी आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
शर्मिला की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर उनका वीडियो साझा किया। कंगना ने कहा कि एक कलाकार के रूप में वह शर्मिला के कला और कविता को देखने के नजरिए से हैरान हैं। उन्होंने इसे “सीमित और कृत्रिम” नजरिया बताया।
कंगना ने कविता और गीतों में रूपक और कल्पना के इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कविता में शब्दों को हमेशा उनके शाब्दिक अर्थ में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, कवि प्रभाव पैदा करने के लिए अलग-अलग कल्पनाओं और प्रतीकों का इस्तेमाल करता है।
अभिनेत्री ने आगे कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को केवल धार्मिक पहचान के नजरिए से देखने के बजाय उसके कलात्मक और राष्ट्रीय भाव को भी समझना चाहिए। उन्होंने शर्मिला से “हिंदू-मुस्लिम मानसिकता से बाहर आने” की अपील की। कंगना का यह बयान उनके व्यक्तिगत विचार के रूप में सामने आया है।
‘वंदे मातरम्’ को लेकर मौजूदा बहस में गीत के अलग-अलग हिस्सों को लेकर विभिन्न मत सामने आ रहे हैं। गीत की शुरुआती दो पंक्तियां मातृभूमि की प्रशंसा करती हैं, जबकि बाद के हिस्सों में हिंदू देवी-देवताओं से जुड़े संदर्भ मिलते हैं। इसी वजह से अलग-अलग धार्मिक समुदायों के बीच इसके पूर्ण संस्करण को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है।
कंगना और शर्मिला टैगोर की टिप्पणियां ऐसे समय में सामने आई हैं, जब ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक बहस तेज है। दोनों अभिनेत्रियों ने इस मुद्दे पर अलग-अलग दृष्टिकोण रखे हैं। कंगना की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला एक बार फिर मनोरंजन जगत और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गया है।







