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होर्मुज में हमलों पर भारत की कड़ी आपत्ति, जयशंकर ने उठाए सवाल

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

अटलांटा। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत पर हुए हमलों को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। शुक्रवार को जी20 विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय बैठक में शामिल होने पहुंचे जयशंकर ने ऊर्जा व्यापार और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संसाधनों पर जानबूझकर किए जा रहे हमले वैश्विक बाजार में कीमतों को प्रभावित करने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं। जयशंकर ने बैठक के दौरान भारत का पक्ष रखते हुए ऊर्जा सुरक्षा और ईरान युद्ध के कारण पैदा हुई चुनौतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने बैठक से जुड़ी प्रमुख बातों को सोशल मीडिया पर साझा किया।

जयशंकर ने कहा कि वर्तमान में दुनिया जिस ऊर्जा संकट का सामना कर रही है, उसकी वजह केवल उत्पादन में कमी नहीं है, बल्कि अनिश्चितता, आपूर्ति में बाधाएं, बढ़ती कीमतें और ऊर्जा संसाधनों तक पहुंचने में आ रही मुश्किलें भी इसकी प्रमुख वजह हैं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर किए जा रहे हमले बाजार में कीमतों को अपने नियंत्रण में रखने की रणनीति का हिस्सा हैं। भारत ने यह भी रेखांकित किया कि प्रतिबंधों, बाधाओं और आपूर्ति में रुकावटों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार लगातार प्रभावित हो रहा है। ऐसी घटनाएं अब अधिक बार हो रही हैं और उनका स्वरूप भी पहले से ज्यादा जटिल होता जा रहा है। इनका असर भी व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है। जयशंकर ने कम आय वाले देशों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि ऊर्जा संकट के कारण उनकी बढ़ती मुश्किलों को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

विदेश मंत्री ने तेल और गैस के मामले में अलग-अलग मानदंड अपनाए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि दोनों ऊर्जा संसाधनों के बीच परिस्थितियों के अनुसार अंतर किया जा रहा है और कुछ विशेष मामलों में दी गई छूट इस स्थिति को स्पष्ट करती है। उन्होंने वैश्विक बाजार में देशों की एक-दूसरे पर निर्भरता का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके दूरगामी प्रभावों को कम करके नहीं आंकना चाहिए। जयशंकर ने दोहराया कि भारत को स्वच्छ खाना पकाने की जरूरतों को पूरा करने के लिए एलपीजी की भरोसेमंद और स्थिर आपूर्ति की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि घरेलू जरूरतों के लिए एलपीजी की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

बैठक में जयशंकर ने महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर भारत की पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत का राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन खनिजों की खोज से लेकर उनके पुनर्चक्रण तक की पूरी प्रक्रिया को शामिल करता है। इसके साथ ही भारत ने जी20 के सामने 'क्रिटिकल मिनरल्स सर्कुलैरिटी इनिशिएटिव' का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों के बेहतर इस्तेमाल और उनकी रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना है। जयशंकर ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को खुला और स्थिर बनाए रखने के लिए जी20 देशों को समझदारी के साथ नेतृत्व करना होगा। इसके लिए वित्तीय सहायता तक पहुंच बढ़ाने के साथ ऊर्जा भंडारण, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों, ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ईंधन जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से काम करने की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक प्रयास और दूरदर्शी फैसले जरूरी हैं।