स्पोर्ट्स डेस्क, शिवेश कुमार शौर्य।
नई दिल्ली | नई दिल्ली में चल रही विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप 2026 में भारत की त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद का ऐतिहासिक सफर सेमीफाइनल में थम गया। शीर्ष वरीयता प्राप्त और गत चैंपियन चीन की तान निंग और लियू शेंगशू की जोड़ी ने भारतीय जोड़ी को तीन गेम तक चले मुकाबले में 18-21, 21-13, 21-8 से हराकर फाइनल में जगह बना ली। हालांकि, सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही त्रिशा और गायत्री ने कांस्य पदक पक्का कर लिया था।
हार के बावजूद यह भारतीय बैडमिंटन के लिए बड़ी उपलब्धि है। त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद विश्व चैंपियनशिप के महिला डबल्स में 15 साल बाद भारत को पदक दिलाने वाली जोड़ी बनी हैं। इससे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने कांस्य पदक जीता था।
पहले गेम में त्रिशा-गायत्री ने दिखाया दम
सेमीफाइनल में भारतीय जोड़ी ने शुरुआत से ही आक्रामक तेवर दिखाए। त्रिशा और गायत्री ने चीनी जोड़ी पर दबाव बनाते हुए शुरुआती बढ़त हासिल की। हालांकि, तान निंग और लियू शेंगशू ने वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।
इसके बाद दोनों जोड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। स्कोर 18-18 से बराबर होने के बाद त्रिशा के शानदार विजेता शॉट ने भारत को बढ़त दिलाई। भारतीय जोड़ी ने इसके बाद जरूरी अंक हासिल किए और पहला गेम 21-18 से अपने नाम कर लिया।
दूसरे गेम में चीन ने बदला मैच का रुख
पहला गेम गंवाने के बाद चीनी जोड़ी ने दूसरे गेम में जोरदार वापसी की। तान निंग और लियू शेंगशू ने भारतीय खिलाड़ियों पर दबाव बढ़ाया और त्रिशा-गायत्री की गलतियों का फायदा उठाया।
भारतीय जोड़ी ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन चीन ने लगातार बढ़त बनाए रखी। अंततः चीनी जोड़ी ने दूसरा गेम 21-13 से जीतकर मुकाबले को निर्णायक तीसरे गेम में पहुंचा दिया।
निर्णायक गेम में पूरी तरह हावी रही चीनी जोड़ी
तीसरे गेम में तान निंग और लियू शेंगशू ने शुरुआत से ही मुकाबले पर पकड़ मजबूत कर ली। भारतीय जोड़ी के लिए पहले गेम जैसी लय हासिल करना मुश्किल रहा। चीन ने लगातार अंक जुटाते हुए बढ़त को बड़ा किया और अंततः तीसरा गेम 21-8 से अपने नाम कर लिया।
करीब 70 मिनट तक चले इस मुकाबले में चीन ने 2-1 से जीत दर्ज की और फाइनल में प्रवेश कर लिया। वहीं, त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद का शानदार अभियान कांस्य पदक के साथ समाप्त हुआ।
15 साल का इंतजार हुआ खत्म
सेमीफाइनल में हार के बावजूद त्रिशा-गायत्री की उपलब्धि ऐतिहासिक है। महिला डबल्स में भारत को विश्व चैंपियनशिप का पिछला पदक 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने दिलाया था। 15 साल बाद त्रिशा जॉली और गायत्री गोपीचंद ने इस इंतजार को खत्म करते हुए विश्व मंच पर भारतीय महिला डबल्स को फिर पोडियम तक पहुंचाया है।






