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200 वर्ष पुरानी ताड़पत्र पाण्डुलिपियां संरक्षित

नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में ज्ञानभारतम् मिशन के तहत 200 वर्ष पुरानी दुर्लभ ताड़पत्र पाण्डुलिपियों का संग्रहण हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के आह्वान पर शुरू इस अभियान ने सांस्कृतिक धरोहर को नई जान दी है।

रायपुर जिले में कलेक्टर डॉ. गौराव सिंह के मार्गदर्शन में प्राचीन पाण्डुलिपियों का दस्तावेजीकरण तेजी से चल रहा है। इसी क्रम में सेजेज निवेदिता, गुरु नानक चौक की व्याख्याता नीतू शर्मा ने डॉ. लक्ष्मीकांत पंडा के आवास से ये अमूल्य पाण्डुलिपियां प्राप्त कीं।

विरासत की जड़ें महासमुंद तक

ये पाण्डुलिपियां मूल रूप से महासमुंद जिले के सरायपाली तहसील के बिरकोल गांव से जुड़ी हैं। ताड़पत्र पर लिखी गई इन दुर्लभ हस्तलिपियों में ज्योतिष शास्त्र और कर्मकांड से जुड़ी विस्तृत जानकारी दर्ज है। ज्ञानभारतम् पोर्टल पर इन्हें सुरक्षित रूप से अपलोड कर डिजिटल संरक्षण का काम पूरा कर लिया गया है।

मिशन का मकसद स्पष्ट है- देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा को बचाना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना। मुख्यमंत्री के आह्वान पर पूरे छत्तीसगढ़ में यह अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें रायपुर जिला अब अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

नीतू शर्मा ने बताया कि पाण्डुलिपियां न सिर्फ उम्र में 200 वर्ष पुरानी हैं, बल्कि अपनी सामग्री के कारण भी अनमोल हैं। इनमें छिपा प्राचीन ज्ञान आधुनिक संदर्भों में भी प्रासंगिक साबित हो सकता है।

सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान

कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के नेतृत्व में जिला स्तर पर गठित समिति लगातार ऐसे दुर्लभ दस्तावेजों की तलाश कर रही है। घर-घर से मिल रही ये पाण्डुलिपियां अब पोर्टल पर उपलब्ध होंगी, ताकि शोधकर्ता, छात्र और आम नागरिक आसानी से इनका अध्ययन कर सकें।

इस पहल से स्थानीय लोगों में अपनी विरासत को लेकर जागरूकता बढ़ी है। कई परिवार अब अपनी पुरानी हस्तलिखित किताबें और ताड़पत्र सौंपने के लिए आगे आ रहे हैं।