नेशनल डेस्क, रानी कुमारी
नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई आज जटिल समस्याओं के समाधान में मदद कर सकता है, लेकिन सही सवाल पूछने की जिम्मेदारी इंसान की ही रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल करते समय मानव की सोच, विवेक और जिम्मेदारी को सबसे ऊपर रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से हमारे जीवन और काम करने के तरीकों को बदल रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, उद्योग और संचार जैसे कई क्षेत्रों में इसका उपयोग बढ़ रहा है। एआई बड़ी मात्रा में जानकारी का विश्लेषण कर कम समय में समाधान उपलब्ध करा सकता है, लेकिन किसी भी समाधान को सही संदर्भ में समझना और उसका उचित उपयोग करना मनुष्य की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि तकनीक का विकास केवल मशीनों को अधिक सक्षम बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य समाज और लोगों के जीवन को बेहतर बनाना भी होना चाहिए। ऐसे समय में यह जरूरी है कि नई तकनीकों का उपयोग नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखकर किया जाए।
राष्ट्रपति ने युवाओं और विद्यार्थियों से विशेष रूप से अपील करते हुए कहा कि उन्हें कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल सुविधा के साधन के रूप में नहीं देखना चाहिए। एआई से जानकारी प्राप्त करने के साथ-साथ स्वयं सोचने, सवाल करने और किसी जानकारी की सत्यता जांचने की आदत भी विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक हमें उत्तर खोजने में सहायता कर सकती है, लेकिन सही प्रश्न तय करने और प्राप्त उत्तर का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने की क्षमता इंसान में ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक का सही उपयोग तभी संभव है, जब मनुष्य उसके इस्तेमाल की दिशा और उद्देश्य को लेकर सजग रहे।







