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'BJP वाले कफन लेकर आए हैं', सोनम वांगचुक पर डिंपल यादव का तीखा हमला

नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा वहां से हटाकर अस्पताल ले जाने की कार्रवाई पर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने इस कदम को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध की आवाज को दबाया जा रहा है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

डिंपल यादव ने कहा कि भाजपा सरकार अब लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों को भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, "BJP वाले देश के लिए सफेद चादर का कफन लेकर आए हैं।" उनके मुताबिक जब शांतिपूर्ण विरोध को बलपूर्वक खत्म किया जाता है तो संविधान और लोकतंत्र दोनों कमजोर होते हैं।

समाजवादी पार्टी की सांसद ने कहा कि सोनम वांगचुक जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की आवाज दबाना केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक आत्मा को आहत करना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और सरकार का दायित्व उस अधिकार की रक्षा करना है, न कि उसे दबाना।

डिंपल यादव ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि सोनम वांगचुक को जबरन जंतर-मंतर से हटाना सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की भावना को कुचलने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अब शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को भी स्वीकार करने की स्थिति में नहीं है और यह तानाशाही की ओर बढ़ते कदमों का संकेत है।

दरअसल, सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे। इसी दौरान दिल्ली पुलिस ने उन्हें धरनास्थल से हटाकर अस्पताल पहुंचाया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों ने सरकार को निशाने पर लेना शुरू कर दिया और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का मामला बताया।

सोनम वांगचुक को हटाए जाने की घटना ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। विपक्ष सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं और शांतिपूर्ण आंदोलनों को कमजोर करने का आरोप लगा रहा है, जबकि इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार जारी है।