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CBSE का बड़ा फैसला: 2026 से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार

नेशनल डेस्क, मुस्कान कुमारी |

CBSE  का बड़ा फैसला: 2026 से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा साल में दो बार, पहली परीक्षा अनिवार्य, दूसरी वैकल्पिक, छात्रों को मिलेगा अंक सुधारने का मौका

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 10 के छात्रों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। 2026 से कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएंगी। पहली परीक्षा सभी छात्रों के लिए अनिवार्य होगी, जबकि दूसरी परीक्षा वैकल्पिक होगी, जो छात्रों को अपने अंकों में सुधार करने का अवसर देगी। यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लिया गया है, जिसका उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम करना और उन्हें अधिक लचीलापन प्रदान करना है।

सीबीएसई के अनुसार, पहला चरण 17 फरवरी 2026 से 6 मार्च 2026 तक चलेगा, जो 18 साल की अवधि तक। दूसरा चरण 5 मई 2026 से 20 मई 2026 तक होगा, जो 16 दिन का होगा। दोनों चरण मिलाकर कुल 34 दिन की अवधि होगी। इस नए प्रावधान से लगभग 26.60 लाख छात्र लाभान्वित होंगे, जो 84 विभिन्न विषयों में परीक्षा देंगे। इन परीक्षाओं के लिए कुल 1,72,90,000 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाएगा, जो इस व्यवस्था की व्यापकता को दर्शाता है।

इस नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि छात्रों के सर्वोत्तम अंक ही अंतिम परिणाम में गिने जाएंगे। प्रैक्टिकल और आंतरिक मूल्यांकन केवल एक बार आयोजित होंगे, और इनके अंक छात्र के सर्वोत्तम लिखित परीक्षा अंकों के साथ जोड़े जाएंगे। पहले चरण के बाद कोई पासिंग दस्तावेज जारी नहीं होगा, लेकिन छात्रों का प्रदर्शन DigiLocker पर उपलब्ध होगा, जिसका उपयोग कक्षा 11 में अस्थायी प्रवेश के लिए किया जा सकता है। अंतिम पासिंग दस्तावेज और मेरिट प्रमाणपत्र दूसरे चरण के परिणामों के बाद ही जारी किए जाएंगे।

सीबीएसई ने कंपार्टमेंट परीक्षाओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब छात्रों को असफल होने पर दोबारा पूरे साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि दूसरा चरण उनके लिए अंक सुधार का अवसर होगा। पहले चरण में सफल छात्रों को कक्षा 11 में अस्थायी प्रवेश मिलेगा, जो दूसरे चरण के परिणामों के बाद पुष्ट किया जाएगा।

विषय परिवर्तन के नियम भी स्पष्ट किए गए हैं। यदि कोई छात्र पहले चरण में किसी विषय में शामिल होता है, तो वह दूसरे चरण में उस विषय को नहीं बदल सकता। हालांकि, यदि छात्र ने पहले चरण में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) विषय में भाग नहीं लिया है, तो उसे दूसरे चरण में इस विषय को चुनने की अनुमति होगी। यह नियम छात्रों को अपनी परीक्षा रणनीति बनाने में मदद करेगा।

सीबीएसई ने इस नीति को लागू करने से पहले एक ड्राफ्ट तैयार किया था, जिस पर 9 मार्च 2025 तक स्कूलों, शिक्षकों, अभिभावकों और छात्रों से सुझाव मांगे गए थे। इन सुझावों के आधार पर नीति को अंतिम रूप दिया गया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि यह सभी हितधारकों के लिए व्यावहारिक और प्रभावी हो।

यह नई व्यवस्था छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव लाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल परीक्षा का तनाव कम होगा, बल्कि छात्रों को अपनी क्षमता को बेहतर ढंग से प्रदर्शित करने का मौका भी मिलेगा। स्कूलों को भी इस नई प्रणाली के लिए तैयारियां शुरू करनी होंगी, क्योंकि दो चरणों की परीक्षाओं के लिए अतिरिक्त संसाधनों और योजना की आवश्यकता होगी।

हालांकि, कुछ सवाल अभी भी बाकी हैं। जैसे, दोनों चरणों के बीच पर्याप्त तैयारी का समय कैसे सुनिश्चित होगा? स्कूलों और शिक्षकों पर बढ़ते कार्यभार का प्रबंधन कैसे किया जाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में सीबीएसई के दिशानिर्देशों से स्पष्ट होंगे।

छात्रों और अभिभावकों के बीच इस फैसले को लेकर उत्साह है। दिल्ली के एक सरकारी स्कूल की छात्रा प्रिया ने कहा, “यह बहुत अच्छा है कि हमें अपने अंक सुधारने का दूसरा मौका मिलेगा। इससे दबाव कम होगा।” वहीं, एक अभिभावक रमेश कुमार ने बताया, “यह व्यवस्था बच्चों के लिए फायदेमंद है, लेकिन स्कूलों को इसे लागू करने में पूरी पारदर्शिता बरतनी होगी।”

सीबीएसई ने इस नीति को लागू करने के लिए सभी स्कूलों को समय पर दिशानिर्देश और सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है। बोर्ड का कहना है कि यह कदम शिक्षा प्रणाली को और अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।