स्टेट डेस्क, मुस्कान सिंह ।
डिलीवरी में परेशानी का दावा, गैस वितरकों ने बॉम्बे हाईकोर्ट का खटखटाया दरवाजा
नागपुर। घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी के लिए लागू किए गए OTP नियम को लेकर अब कानूनी विवाद शुरू हो गया है। एलपीजी वितरकों के संगठन एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (इंडिया) ने इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की है। संगठन का कहना है कि इस नियम के कारण उपभोक्ताओं और डिलीवरी एजेंसियों दोनों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल, गैस कंपनियों की ओर से घरेलू सिलेंडर की डिलीवरी के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड यानी OTP सिस्टम लागू किया गया है। इस व्यवस्था के तहत सिलेंडर ग्राहक को तभी दिया जाता है, जब वह मोबाइल पर आए OTP को डिलीवरी कर्मी को बताए। सरकार और गैस कंपनियों का कहना है कि यह सिस्टम फर्जी डिलीवरी और गड़बड़ियों को रोकने के लिए शुरू किया गया है।
हालांकि, वितरकों का आरोप है कि जमीन पर यह व्यवस्था कई जगहों पर ठीक से काम नहीं कर रही है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में नेटवर्क की समस्या के कारण ग्राहकों के मोबाइल पर OTP समय पर नहीं पहुंचता। इससे डिलीवरी में देरी हो रही है और कई बार सिलेंडर वापस ले जाना पड़ता है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे की खंडपीठ ने की। अदालत में वितरकों की ओर से कहा गया कि OTP नियम लागू होने के बाद डिलीवरी कर्मियों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है और रोजाना कई विवाद की स्थिति भी बन रही है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि कई बुजुर्ग, अशिक्षित और तकनीक से दूर लोग OTP प्रक्रिया को आसानी से समझ नहीं पाते। कई मामलों में ग्राहक का मोबाइल नंबर बंद रहता है या किसी दूसरे परिवार सदस्य के नाम पर होता है, जिससे गैस डिलीवरी में परेशानी आती है। वितरकों का कहना है कि इससे आम लोगों को बेवजह परेशान होना पड़ रहा है।
वितरकों ने अदालत से मांग की है कि इस नियम की दोबारा समीक्षा की जाए और जब तक सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक इसकी अनिवार्यता पर रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि सुरक्षा और पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे उपभोक्ताओं को दिक्कत न हो।
वहीं, सरकारी पक्ष और गैस कंपनियों का कहना है कि OTP सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ी है और इससे यह सुनिश्चित होता है कि सिलेंडर सही ग्राहक तक पहुंच रहा है। कंपनियों के मुताबिक, इस व्यवस्था से फर्जी बुकिंग और गलत डिलीवरी पर रोक लगाने में मदद मिली हैं।हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर देशभर के लाखों गैस उपभोक्ताओं और वितरकों पर पड़ सकता है।






