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One Nation One Election पर CJI चंद्रचूड़ का बयान: EC की शक्तियों और संविधान पर जताई चिंता

नेशनल डेस्क,नीतीश कुमार |

देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने 'वन नेशन, वन इलेक्शन' यानी एक साथ चुनाव कराने की योजना को लेकर कुछ अहम विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि यह योजना तब तक संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन नहीं मानी जाएगी, जब तक यह यह सिद्ध न हो जाए कि अलग-अलग समय पर चुनाव कराना ही संविधान का अनिवार्य तत्व है।

यह विचार उन्होंने संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के समक्ष रखे हैं, जिसे सरकार ने इस प्रस्ताव की जांच के लिए गठित किया है। JPC की बैठक की सही तारीख 11 जुलाई 2025 है, जो आगामी बैठक है, न कि कोई पिछली बैठक। समिति 11 जुलाई को पूर्व CJI चंद्रचूड़ और जस्टिस जे.एस. खेहर से इस विषय पर विस्तार से चर्चा करेगी। सरकार की मंशा है कि 2029 के बाद इस व्यवस्था को लागू किया जाए, हालांकि व्यवहारिक रूप से यह 2034 से ही पूरी तरह संभव हो पाएगा।

चुनाव आयोग की शक्तियों पर जताई चिंता;  
पूर्व CJI चंद्रचूड़ ने ONOE से जुड़े प्रस्तावित विधेयक में चुनाव आयोग को दी जाने वाली "बहुत व्यापक और अस्पष्ट शक्तियों" को लेकर चिंता जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि इन शक्तियों को स्पष्ट और सीमित किया जाना चाहिए, ताकि संविधान की पारदर्शिता और संतुलन बना रहे।

एक साथ चुनाव का ऐतिहासिक संदर्भ;
भारत में स्वतंत्रता के बाद 1952 से 1967 तक लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे। लेकिन बाद में समय से पहले सदनों के भंग होने के कारण यह चक्र टूट गया। सरकार अब दोबारा उसी प्रणाली को अपनाने की दिशा में बढ़ रही है।

संविधान संशोधन प्रस्ताव; 
ONOE को लागू करने के लिए अनुच्छेद 82(ए) जोड़ने और अनुच्छेद 83, 172 और 327 में संशोधन की योजना है। इस बदलाव का लक्ष्य 2029 के आम चुनावों के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना है।

लोकतांत्रिक सिद्धांतों को बनाए रखने पर जोर;
पूर्व CJI ने इस बात पर बल दिया कि कोई भी चुनावी व्यवस्था लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों, जैसे कि प्रतिनिधित्व का अधिकार और निष्पक्ष प्रक्रिया, को कमजोर नहीं कर सकती। उन्होंने मतदाताओं की जागरूकता पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत के नागरिकों को 'नादान' मानना सही नहीं होगा।