विदेश डेस्क, ऋषि राज
नई दिल्ली/बिश्केक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान की सफल यात्रा के बाद रविवार देर रात किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिश्केक पहुंच गए, जहां वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री के बिश्केक पहुंचने पर उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। इस यात्रा को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बिश्केक हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन के बाद किर्गिज गणराज्य के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, किर्गिज गणराज्य के मंत्रिमंडल के अध्यक्ष और राष्ट्रपति प्रशासन के प्रमुख कासिमालिएव आदिलबेक अलेशोविच ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री अपने निर्धारित कार्यक्रमों के लिए रवाना हुए।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा एससीओ के शिखर सम्मेलन के लिहाज से विशेष महत्व रखती है। सम्मेलन में संगठन से जुड़े सदस्य देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे। एससीओ एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है, जिसके माध्यम से सदस्य देश आपसी सहयोग और विभिन्न साझा विषयों पर संवाद करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। बिश्केक में आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण आयोजन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी। विभिन्न देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी के कारण सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री की बिश्केक यात्रा से पहले उनकी उज्बेकिस्तान यात्रा संपन्न हुई। इसके बाद सीधे किर्गिस्तान पहुंचकर एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेना भारत की क्षेत्रीय कूटनीतिक गतिविधियों के महत्व को दर्शाता है। भारत लगातार विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों के माध्यम से अन्य देशों के साथ संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर देता रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी के आगमन को लेकर बिश्केक में आवश्यक तैयारियां की गईं। हवाई अड्डे पर औपचारिक स्वागत के बाद उनका कार्यक्रम एससीओ शिखर सम्मेलन से जुड़े आयोजनों की ओर केंद्रित रहेगा। सम्मेलन के दौरान विभिन्न सदस्य देशों के नेताओं के साथ मुलाकात और विचार-विमर्श भी महत्वपूर्ण रहेगा।
एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी से भारत को संगठन के मंच पर अपने विचार रखने का अवसर मिलेगा। बिश्केक में होने वाला यह सम्मेलन क्षेत्रीय सहयोग और सदस्य देशों के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।







