स्टेट डेस्क, मुस्कान सिंह
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी में कहा कि किसी व्यक्ति का छोटा-सा शौक भी मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के साथ आगे चलकर बड़ी सफलता का आधार बन सकता है। उन्होंने अपने संबोधन में ऐसे लोगों के उदाहरण साझा किए, जिन्होंने अपनी रुचि को मेहनत से जोड़कर नई संभावनाएं पैदा कीं। प्रधानमंत्री ने नागालैंड के फेक जिले की रहने वाली वैसालु पुरे की कहानी का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वैसालु को बचपन से ही फूलों से विशेष लगाव था। इसी रुचि को उन्होंने आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2021 में छोटे स्तर पर फूलों की खेती शुरू की।
मोदी के अनुसार, वैसालु पुरे ने स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से वैज्ञानिक तरीके से खेती का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने करीब एक चौथाई एकड़ जमीन में ग्लैडियोलस के हजारों पौधे लगाए। शुरुआती प्रयास में ही उन्हें अच्छी सफलता मिली और बड़ी संख्या में फूलों का उत्पादन हुआ।
प्रधानमंत्री ने कहा कि शुरुआती सफलता के बाद वैसालु ने फूलों की खेती का दायरा बढ़ाया। जो फूल पहले केवल स्थानीय बाजार तक सीमित थे, उनकी पहुंच अब नागालैंड से बाहर दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक भी होने लगी है। इससे यह उदाहरण सामने आता है कि किसी व्यक्ति की रुचि जब निरंतर प्रयास और उचित दिशा के साथ आगे बढ़ती है तो वह रोजगार और आय के नए अवसर भी पैदा कर सकती है। जीवन में किसी भी काम की शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन सही सोच और लगातार मेहनत उसे बड़ी उपलब्धि में बदल सकती है। उन्होंने कहा कि शौक केवल समय बिताने का जरिया नहीं है, बल्कि यदि उसे कौशल और परिश्रम से जोड़ा जाए तो यह व्यक्ति के लिए नई राह खोल सकता है।
उन्होंने वैसालु पुरे के उदाहरण के जरिए युवाओं और आम लोगों को अपनी रुचियों को पहचानने तथा उन्हें गंभीरता से आगे बढ़ाने का संदेश दिया। पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि सही मार्गदर्शन मिलने पर स्थानीय स्तर की पहल भी बड़े बाजार तक पहुंच बना सकती है।
मेहनत और मार्गदर्शन को बताया अहम
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केवल रुचि होना पर्याप्त नहीं है। उसके साथ मेहनत, सीखने की इच्छा और सही मार्गदर्शन भी जरूरी है। फूलों की खेती के मामले में वैज्ञानिक प्रशिक्षण ने वैसालु पुरे को अपने शौक को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद की। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण बताते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में शुरू किया गया छोटा प्रयास भी आगे चलकर कई लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है। साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन और बाजार से जुड़ने की संभावनाएं भी मजबूत होती हैं। यह संदेश ‘मन की बात’ के उस हिस्से में सामने आया, जिसमें उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में अपने प्रयासों से बदलाव लाने वाले लोगों की उपलब्धियों को देश के सामने रखा।






