लोकल डेस्क, एन के सिंह।
अरेराज में जनसुनवाई के दौरान लापरवाह सर्किल इंस्पेक्टर का वेतन रोका, SP स्वर्ण प्रभात के सख्त तेवर से पुलिसिंग का बदला चेहरा
पूर्वी चंपारण: अब अपराधियों की खैर नहीं है और लापरवाह पुलिसकर्मियों के लिए भी अब जिला पुलिस मुख्यालय में कोई जगह नहीं बची है। जिले के कप्तान SP स्वर्ण प्रभात ने एक बार फिर साबित कर दिया हैं, कि उनकी डिक्शनरी में 'लापरवाही' शब्द के लिए कोई माफी नहीं है। बुधवार को अरेराज अनुमंडल में आयोजित 'जनसंवाद' कार्यक्रम उस वक्त 'इंसाफ की अदालत' में तब्दील हो गया, जब एक पीड़ित परिवार के आंसू देख SP का पारा चढ़ गया और मौके पर ही एक बड़े अधिकारी पर गाज गिर गई।
'जनसुनवाई' के माध्यम से आम जनता और पुलिस के बीच की खाई को पाटने की सफल कोशिश।
जब 'साहब' की सख्ती देख कांप गए मातहत
बुधवार का दिन अरेराज अनुमंडल के लिए महज एक प्रशासनिक बैठक नहीं, बल्कि इंसाफ की एक नई उम्मीद लेकर आया। अरेराज थाना परिसर में 'जनता दरबार एवं पुलिस-पब्लिक जनसंवाद' का आयोजन चल रहा था। तभी पहाड़पुर से आया एक पीड़ित परिवार अधिकारियों के सामने फूट-फूट कर रोने लगा।
क्या था मामला? पीड़ित परिवार ने गुहार लगाई कि उनके परिजन पर जानलेवा हमला हुआ था, सिर फट गया था और 4-5 टांके आए थे। लेकिन जब पुलिसिया कागजी कार्रवाई हुई, तो खेल बदल गया। रसूखदारों के दबाव में या लापरवाही के कारण, सर्किल इंस्पेक्टर ने मामले की धाराओं को इतना 'हल्का' कर दिया कि संगीन अपराध महज एक मामूली विवाद बनकर रह गया।
मौके पर फैसला: जैसे ही यह मामला SP स्वर्ण प्रभात के संज्ञान में आया, उन्होंने फाइलों की पड़ताल की। हकीकत सामने आते ही कप्तान का 'हंटर' चला। उन्होंने तत्काल प्रभाव से संबंधित सर्किल इंस्पेक्टर का वेतन रोकने (Hold करने) का आदेश सुना दिया। साथ ही कड़े लहजे में कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी में एक मिनट की भी देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
"खाकी" अब रक्षक, भक्षक नहीं!
जनसुनवाई के दौरान अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) अरेराज, सर्किल इंस्पेक्टर, थानाध्यक्ष और कई थानों के अनुसंधानकर्ताओं की मौजूदगी में SP ने स्पष्ट कर दिया कि पुलिस की वर्दी आम आदमी की सुरक्षा के लिए है।
"हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—हर पीड़ित को यह महसूस होना चाहिए कि पुलिस उसकी ढाल है। निष्पक्ष जांच हमारी पहली प्राथमिकता है। जो भी पुलिस पदाधिकारी अपने काम में कोताही बरतेंगे या जांच को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे, उन पर इससे भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई निश्चित है।"
पुलिस प्रशासन, मोतिहारी
बढ़ रहा है जनता का विश्वास
पूर्वी चंपारण में पुलिसिंग का चेहरा अब पूरी तरह बदल रहा है। जहाँ एक ओर अपराधियों के खिलाफ 'सघन अभियान' छिड़ा है, वहीं दूसरी ओर कप्तान खुद जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। अब न्याय की उम्मीद में थाने पहुंचने वाले फरियादियों को खाली हाथ नहीं लौटना पड़ रहा। त्वरित कार्रवाई और अधिकारियों की जवाबदेही तय होने से जिले में पुलिस के प्रति आम जनता का भरोसा एक बार फिर बहाल होता दिख रहा है।







