लोकल डेस्क, एन के सिंह।
बेटियों की सुरक्षा में 'अभय कवच', स्कूल से लेकर शादी की विदाई तक पुलिस का विशेष पहरा, खाकी के मानवीय चेहरे ने जीता चंपारण का दिल।
पूर्वी चंपारण: बिहार के सीमावर्ती जिले पूर्वी चंपारण में इन दिनों न्याय का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है। जब से चर्चित आईपीएस अधिकारी स्वर्ण प्रभात ने मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक की कमान संभाली है, जिले की फिजां बदल गई है। अपराधियों में जहां उनके नाम का खौफ है, वहीं आम जनता के लिए खाकी अब डर नहीं, बल्कि भरोसे का प्रतीक बन गई है। यह महज पुलिसिंग नहीं, बल्कि 'मानवीय संवेदनाओं' और 'सख्ती' का एक ऐसा अनूठा संगम है, जिसे मोतिहारी की जनता 'स्वर्ण युग' पुकार रही है।
अपराधियों पर 'इनामों की बरसात' और भ्रष्टाचार पर प्रहार
स्वर्ण प्रभात की कार्यशैली का सबसे कड़ा पक्ष अपराधियों के विरुद्ध उनका 'जीरो टॉलरेंस' है। जिले के कुख्यात अपराधियों की कमर तोड़ने के लिए उन्होंने 'इनाम घोषित' करने की जो रणनीति अपनाई, उसने अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। आज स्थिति यह है कि मादक पदार्थों के तस्कर और शातिर अपराधी या तो सलाखों के पीछे हैं या जिला छोड़कर पलायन कर चुके हैं। एसपी की नजर केवल बाहर ही नहीं, बल्कि विभाग के भीतर भी है; भ्रष्टाचार में लिप्त 'काली भेड़ों' पर उनकी गाज गिरने से पूरे पुलिस महकमे में अनुशासन का नया दौर शुरू हुआ है।
बेटियों की सुरक्षा, स्कूल से डोली तक पुलिस का पहरा
महिला सुरक्षा को लेकर स्वर्ण प्रभात ने जो मिसाल पेश की है, वह पूरे बिहार के लिए एक मॉडल है। स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं के लिए 'सुरक्षित कॉरिडोर' और पर्व-त्योहारों पर चाक-चौबंद व्यवस्था ने अभिभावकों के डर को खत्म कर दिया है। उनकी संवेदनशीलता का सबसे सुंदर उदाहरण तब दिखा जब उन्होंने 'बेटियों की विदाई' में पुलिस सुरक्षा सुनिश्चित की। एक बुजुर्ग किसान की बेटी की शादी में जब मनचलों का साया पड़ा, तो एसपी के निर्देश पर पुलिस ने ढाल बनकर उस पिता की मुस्कान बचाई। आज मोतिहारी की बेटियाँ निडर होकर घर से बाहर निकल रही हैं।
मुख्यमंत्री से मिला सम्मान, कर्मठता का राजकीय प्रमाण
स्वर्ण प्रभात की यह सफलता अचानक नहीं मिली है, बल्कि यह उनके वर्षों के कठिन परिश्रम का परिणाम है। उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और बेहतर पुलिसिंग के रिकॉर्ड को देखते हुए, लगभग दो वर्ष पूर्व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तत्कालीन मुख्य सचिव आमिर सुभानी ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। वह सम्मान आज मोतिहारी की सड़कों पर सुरक्षा के रूप में दिखाई दे रहा है।
ट्रैफिक सुधार से लेकर शराबबंदी तक 'ऑलराउंड' प्रदर्शन
मोतिहारी की जटिल ट्रैफिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना हो या नेपाल सीमा से सटे इलाकों में शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करना, स्वर्ण प्रभात ने हर मोर्चे पर अपनी काबिलियत साबित की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि— "अमन-चैन पसंद करने वाले लोग अब चैन की नींद सो रहे हैं, जबकि अपराध की दुनिया में हड़कंप मचा है।"
खाकी का नया चेहरा
आईपीएस स्वर्ण प्रभात ने सिद्ध कर दिया है कि पुलिस का काम केवल डंडा चलाना नहीं, बल्कि समाज में सुरक्षा का अहसास दिलाना है। वर्दी के पीछे छिपी उनकी मानवीय संवेदनाओं ने पुलिस की छवि को 'दमनकारी' से बदलकर 'सहयोगी' बना दिया है। चंपारण की इस पावन धरती पर पुलिसिंग का यह स्वर्ण अध्याय न केवल अपराध मुक्त समाज बना रहा है, बल्कि भावी पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा भी पेश कर रहा है।







