स्टेट डेस्क, आर्या कुमारी।
पटना, आरक्षण के मुद्दे पर जारी राजनीतिक बहस के बीच राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर निशाना साधते हुए बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि देश में कई ऐसे महत्वपूर्ण पद हैं, जहां अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के 10 लोग भी नजर नहीं आते। तेजस्वी ने यह बयान आरक्षण सुधार आंदोलन के बाद तेज हुई राजनीतिक बहस के बीच दिया है।
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि देश की यूनिवर्सिटियों में SC, ST और OBC समुदायों से जुड़े 10 वाइस चांसलर भी मुश्किल से मिलेंगे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार में इन वर्गों से आने वाले 10 सचिव भी नहीं हैं। इसी तरह हाई कोर्ट में भी पिछड़े और दलित समुदायों से जुड़े 10 जजों का आंकड़ा पूरा नहीं होता। तेजस्वी ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए देश के महत्वपूर्ण संस्थानों में पिछड़े, दलित और आदिवासी समुदायों की भागीदारी पर सवाल उठाया।
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आरक्षण के मुद्दे को लेकर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब आरक्षण का सवाल सामने आता है तो गठबंधन में शामिल अलग-अलग नेताओं के रुख अलग दिखाई देते हैं। उनके मुताबिक, कोई नेता आरक्षण के समर्थन में बोलता है तो कोई इसका विरोध करता है, जबकि दूसरी ओर वही नेता सत्ता में बने रहने के लिए गठबंधन का हिस्सा हैं।
तेजस्वी ने कहा कि बीजेपी को आरक्षण और संविधान की वास्तविक चिंता नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऐसे नेता हैं जो खुद आरक्षण के पक्ष में बात करते हैं और आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक लाभ भी लेते हैं, लेकिन उसी पार्टी और गठबंधन के साथ सरकार में शामिल हैं, जिस पर आरक्षण खत्म करने की कोशिशों के आरोप लगते रहे हैं। तेजस्वी ने इसे नेताओं के राजनीतिक हित और सत्ता से जुड़े रहने की कोशिश बताया।
अपने बयान में तेजस्वी यादव ने कई एनडीए नेताओं का नाम भी लिया। उन्होंने चिराग पासवान, नीतीश कुमार, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा का जिक्र करते हुए कहा कि ये नेता आरक्षण के मुद्दे पर अलग-अलग समय में अपनी बात रखते रहे हैं, लेकिन एनडीए के साथ मिलकर सरकार का हिस्सा भी हैं। उन्होंने दूसरे राज्यों के नेताओं का उदाहरण देते हुए अनुप्रिया पटेल, ओम प्रकाश राजभर, संजय निषाद और रामदास अठावले का भी नाम लिया।
तेजस्वी यादव का आरोप है कि पासवान, मांझी, कुशवाहा, अठावले, राजभर और निषाद जैसे नेता आरक्षण के लाभ और उसके समर्थन की बात करते हैं, लेकिन ऐसी राजनीतिक ताकत के साथ खड़े हैं जिस पर आरक्षण को कमजोर करने के आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इन नेताओं की स्थिति विरोधाभासी है क्योंकि एक तरफ वे आरक्षण की बात करते हैं और दूसरी तरफ उसी व्यवस्था का हिस्सा बने हुए हैं, जिसके खिलाफ वे राजनीतिक रूप से सवाल उठाते हैं।
आरक्षण सुधार आंदोलन के बाद देश में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हुई है। अलग-अलग दल और नेता आरक्षण की व्यवस्था, संविधान और सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर अपने-अपने तर्क सामने रख रहे हैं। इसी बीच तेजस्वी यादव के इस बयान ने एक बार फिर सरकारी संस्थानों और संवैधानिक व्यवस्था में SC, ST और OBC समुदायों की भागीदारी को लेकर बहस को तेज कर दिया है।






