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ईरान युद्ध पर ट्रंप के पूर्व रक्षा प्रमुख की बड़ी चेतावनी

विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव लगातार गंभीर होता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने युद्ध की रणनीति को लेकर अहम चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि केवल हवाई हमलों के भरोसे ईरान के खिलाफ जीत हासिल नहीं की जा सकती। एस्पर का मानना है कि लगातार बमबारी से तेहरान की नीतियों में बदलाव आने की संभावना बेहद कम है और इससे संघर्ष और लंबा खिंच सकता है।

मार्क एस्पर ने एक इंटरव्यू में कहा कि किसी भी बड़े संघर्ष का समाधान सिर्फ सैन्य ताकत के जरिए नहीं निकाला जा सकता। उनके अनुसार, हवाई हमले तत्काल नुकसान तो पहुंचा सकते हैं, लेकिन वे किसी देश की राजनीतिक इच्छाशक्ति या रणनीतिक फैसलों को आसानी से नहीं बदल सकते। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका को इस संकट के समाधान के लिए सैन्य कार्रवाई के साथ अन्य विकल्पों पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।

एस्पर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को और तेज करने के संकेत दिए हैं। दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहे हमलों और जवाबी कार्रवाइयों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह आगे बढ़ता रहा तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता पर पड़ सकता है।

इस बीच ईरान की राजधानी तेहरान के आसपास एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय होने की खबरें सामने आई हैं। वहीं, बोरूजर्द शहर के नजदीक भी कई धमाकों की सूचना मिली है। हालांकि, इन विस्फोटों की वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है और न ही किसी पक्ष की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि की गई है। घटनाओं को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है और हालात पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

उधर, सार्वजनिक फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइटों पर अमेरिकी सैन्य विमानों की गतिविधियां भी दर्ज की गई हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इलाके के ऊपर तीन KC-135 और दो KC-46A एयर-टैंकर विमान उड़ान भरते दिखाई दिए, जिनका इस्तेमाल लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन उपलब्ध कराने के लिए किया जाता है। इसके अलावा एक E-3 AWACS विमान भी सक्रिय नजर आया, जिसका उपयोग हवाई निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणाली के रूप में किया जाता है।

हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने वाली जानकारी पूरी सैन्य गतिविधि का प्रतिनिधित्व नहीं करती। सुरक्षा कारणों से कई सैन्य विमान अपनी लोकेशन सार्वजनिक नहीं करते, इसलिए वास्तविक सैन्य अभियान इससे कहीं अधिक व्यापक हो सकता है। फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर आक्रामक रुख बनाए हुए हैं। अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है, जबकि ईरान भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले कर चुका है। ऐसे में क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।