नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
कोलकाता। उत्तर कोलकाता के चोरबागान स्थित दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार 17 अक्टूबर की शाम भगदड़ मचने से बड़ा हादसा हो गया। घटना रात करीब 7:40 बजे की बताई जा रही है। बारिश शुरू होने के बाद पंडाल में प्रवेश करने के लिए लोगों की भीड़ अचानक बढ़ गई। संकरे प्रवेश और निकास मार्गों पर भीड़ का दबाव बढ़ने से अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई और कई लोगों के गिरने के बाद भगदड़ मच गई। हादसे में अब तक 19 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
हादसे के बाद प्रशासन ने घटनास्थल पर लोगों की आवाजाही रोक दी और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भगदड़ की मुख्य वजह क्या थी और क्या पंडाल में लोगों के आने-जाने के रास्ते पर्याप्त थे। इसके अलावा भीड़ को नियंत्रित करने की व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और मौके पर तैनात कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रही है, ताकि हादसे से पहले और उसके दौरान की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।
हादसे की जांच के दायरे में पूजा आयोजन समिति के पदाधिकारी, निजी सुरक्षा कर्मी और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। प्रशासन यह भी देख रहा है कि पंडाल में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए थे या नहीं। फिलहाल यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि हादसा बारिश के बाद अचानक बढ़ी भीड़ के कारण हुआ, संकरे रास्तों की वजह से स्थिति बिगड़ी या सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की कमी रही।
हादसे के बाद मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। पश्चिम बंगाल सरकार ने मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये की सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की बात कही है। वहीं, हादसे में घायल लोगों को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने के साथ उनके इलाज का खर्च उठाने की भी घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री की ओर से भी मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता दिए जाने की जानकारी दी गई है।
घटना के बाद चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के महासचिव सहित कुछ अन्य पदाधिकारियों के इस्तीफा देने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, यह अभी साफ नहीं हुआ है कि पदाधिकारियों के इस्तीफे का हादसे की जिम्मेदारी से क्या संबंध है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भगदड़ के लिए भीड़, रास्तों की व्यवस्था या सुरक्षा इंतजामों में से कौन-सा कारण मुख्य रूप से जिम्मेदार था।
हादसे के समय मौके पर मौजूद चश्मदीदों ने भी भगदड़ की स्थिति का जिक्र किया। एक महिला ने बताया कि पंडाल के अंदर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए माइक के जरिए लगातार लोगों को निर्देश दिए जा रहे थे। लोगों से ठीक तरह से आगे बढ़ने और ज्यादा झुकने से बचने की अपील की जा रही थी, क्योंकि ऐसा करने से भगदड़ की स्थिति पैदा होने की आशंका थी। इसके बावजूद भीड़ का दबाव बढ़ता गया और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
इस हादसे के बाद पूजा पंडाल में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन की जांच में पंडाल की प्रवेश-निकास व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम, भीड़ नियंत्रण और आयोजन से जुड़े लोगों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। फिलहाल हादसे में 19 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने की जानकारी है, जबकि घटना की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच जारी है।







