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क्या तेजस्वी यादव रहेंगे नेता प्रतिपक्ष?

स्टेट डेस्क, नीतीश कुमार।

क्या तेजस्वी यादव ही रहेंगे नेता प्रतिपक्ष? नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में शामिल हुए लालू यादव और राबड़ी देवी

बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए राजद की ओर से सोमवार को एक बड़ी समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक निर्णय लेते हुए यह स्पष्ट कर दिया गया कि तेजस्वी यादव आगे भी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे। इस फैसले ने तेजस्वी के नेतृत्व में संभावित बदलाव को लेकर चल रही तमाम अटकलों को समाप्त कर दिया। साथ ही यह भी तय किया गया कि पार्टी अपनी भविष्य की राजनीतिक रणनीति तेजस्वी यादव के मार्गदर्शन में ही आगे बढ़ाएगी। चुनावी हार के बाद यह पहली बड़ी बैठक थी, जिसमें पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कई अहम निर्देश दिए।

सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह रहा कि तेजस्वी यादव ही विपक्ष के नेता के रूप में काम करते रहेंगे। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी नेतृत्व में बदलाव की चर्चा जरूर थी, लेकिन लालू यादव ने साफ कहा कि विपक्ष की कमान तेजस्वी के पास ही रहेगी। सूत्रों के अनुसार, बैठक में चुनाव में उम्मीद के अनुरूप सफलता न मिलने की वजहों पर गंभीर चर्चा की गई।
नेताओं ने कहा कि पार्टी अपनी बात मतदाताओं तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचा पाई, खासकर स्थानीय स्तर पर महिला और युवा वोटरों के बीच पकड़ कमजोर रही। कुछ नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विरोधी दलों द्वारा कथित रूप से महिलाओं को दस हजार रुपये देकर वोट खरीदने जैसी घटनाएं भी सामने आईं, जिस पर पार्टी आगे विचार करेगी।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में तेजस्वी यादव ने खुद को मात्र एक कार्यकर्ता बताते हुए पार्टी में उसी रूप में काम करने की इच्छा जताई, लेकिन वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और पूर्व विधायकों ने इस प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया। सभी ने एक स्वर में तेजस्वी को नेता प्रतिपक्ष बने रहने का आग्रह किया।
पार्टी नेताओं की इस मांग पर लालू प्रसाद यादव ने तुरंत सहमति दे दी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि घर की समस्याएं घर वाले मिल बैठकर हल कर लेंगे, चिंता की जरूरत नहीं है। पार्टी ने अपने सभी विधायकों को निर्देश दिया है कि वे सदन में मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाएं।

इस फैसले के साथ राजद अब चुनावी हार को पीछे छोड़कर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में संगठनात्मक कमजोरियों को दूर करने और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने पर ध्यान देगी। बैठक में मौजूद परबत्ता के पूर्व विधायक डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि जो नतीजे आए हैं, वे वाकई चौंकाने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि यह बिना किसी "सेटिंग" के संभव नहीं है। लोग इसे नीतीश कुमार के विकास की जीत बता रहे हैं, लेकिन मैंने भी अपने क्षेत्र में काफी विकास कार्य किए थे फिर भी मैं हार गया। डॉ. संजीव ने एक बार फिर ईवीएम सेटिंग का आरोप दोहराया।

उन्होंने बताया कि चुनाव से पहले 65 सीटों की एक सूची तैयार की गई थी, जिसमें उनकी सीट भी शामिल थी। यह सूची एक अधिकारी के पास थी और उन्होंने खुद भी इसे देखा है। इन 65 सीटों को विशेष रूप से टारगेट किया गया था।
उन्होंने पार्टी के जीते उम्मीदवारों के जीत के अंतर पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन 25 विधायकों को बड़ी बढ़त मिलनी चाहिए थी, वे सिर्फ 10-11 हजार वोटों से जीते हैं, जबकि कई सीटों पर वे 50 हजार से अधिक की बढ़त के दावेदार थे।
उन्होंने कहा कि जो लोग यह कह रहे हैं कि राजद को जनता का समर्थन नहीं मिला, वे वोट प्रतिशत देखें राजद को 1.80 करोड़ वोट मिले हैं, जो बहुत स्पष्ट रूप से बताता है कि पार्टी को मजबूत जनसमर्थन मिला है।