विदेश डेस्क,श्रेयांश पराशर l
तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि मौजूदा संघर्ष का अंत तभी संभव है जब यह स्पष्ट और ठोस गारंटी दी जाए कि भविष्य में इस तरह के हमले दोबारा नहीं होंगे। साथ ही उन्होंने युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी उठाई है।
एक प्रमुख अरबी समाचार पत्र ‘अल-अरबी अल-जदीद’ को दिए साक्षात्कार में अराघची ने कहा कि ईरान शांति और स्थिरता का समर्थन करता है, लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि सभी पक्ष यह भरोसा दिलाएं कि क्षेत्र में फिर से इस तरह की आक्रामक घटनाएं नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी ठोस गारंटी नहीं दी जाती, तो संघर्ष को समाप्त करना मुश्किल होगा।
ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी प्रस्ताव रखा कि क्षेत्रीय देशों के सहयोग से एक संयुक्त जांच समिति का गठन किया जाए, जो हाल के हमलों और घटनाओं की निष्पक्ष जांच कर सके। उनका कहना था कि ऐसी जांच से सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में तनाव को कम करने में मदद मिलेगी।
अराघची ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि तेहरान की सैन्य कार्रवाई केवल इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और हितों तक सीमित रही है। उन्होंने इस आरोप का खंडन किया कि ईरान ने पड़ोसी देशों के नागरिक इलाकों या आम लोगों को निशाना बनाया है।
इसके अलावा उन्होंने आशंका जताई कि अरब देशों के नागरिक ठिकानों पर हुए कुछ हमलों के पीछे इज़राइल का हाथ हो सकता है, जिसका उद्देश्य ईरान और उसके पड़ोसी अरब देशों के बीच संबंधों को खराब करना है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान के ऊर्जा केंद्रों या तेल सुविधाओं को निशाना बनाया गया, तो तेहरान कड़ा जवाब देगा। ऐसी स्थिति में क्षेत्र में सक्रिय अमेरिकी कंपनियों और उनके ठिकानों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। ईरान ने एक बार फिर दोहराया कि वह क्षेत्र में शांति चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा और हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।







