एंटरटेनमेंट डेस्क, अर्पिता कृष्णा |
बिहार के जमुई में दो नाबालिग छात्रों के कथित उत्पीड़न का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामले को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। इसी मामले पर अभिनेत्री आयशा खान ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर घटना को लेकर नाराजगी जताई और ‘मोरल पुलिसिंग’ के नाम पर किए जा रहे व्यवहार पर सवाल उठाए।
आयशा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि बिहार में जो हुआ, उसे देखकर उन्हें बेहद बुरा महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को घेरकर डराना और अपमानित करना नैतिकता नहीं है। अभिनेत्री ने ‘संस्कृति’ के नाम पर उत्पीड़न को सही ठहराने की कोशिशों पर भी सवाल उठाया।
एक अन्य इंस्टाग्राम स्टोरी में आयशा ने पूछा कि किसी को ‘मोरल पुलिसिंग’ करने का अधिकार किसने दिया। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि घटना के दौरान मौजूद लोग पीड़ितों की मदद करने के बजाय वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो साझा किए जाने को लेकर भी चिंता जताई।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटना 19 सितंबर को जमुई में हुई थी। दो कक्षा 10 के छात्र कोचिंग से लौट रहे थे, तभी उन्हें कुछ लोगों ने कथित तौर पर रोका। पुलिस के अनुसार, घटना का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। हालांकि, हिंदुस्तान टाइम्स ने स्पष्ट किया है कि वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की और विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया। पुलिस के मुताबिक, वीडियो के आधार पर संदिग्धों की पहचान की गई और शुरुआती कार्रवाई में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। मामले में पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी है। हिंदुस्तान टाइम्स की बाद की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य आरोपी बताए जा रहे नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार किया गया। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
आयशा खान की प्रतिक्रिया के बाद जमुई मामले को लेकर ‘मोरल पुलिसिंग’ और सोशल मीडिया पर संवेदनशील वीडियो साझा किए जाने को लेकर बहस और तेज हो गई है। अभिनेत्री ने अपने बयान में इस तरह के व्यवहार को नैतिकता या संस्कृति के नाम पर उचित ठहराने के बजाय पीड़ितों के साथ हुए कथित उत्पीड़न पर ध्यान देने की बात कही है।






