विदेश डेस्क, ऋषि राज
टोक्यो। जापान ने रविवार को उत्तर कोरिया द्वारा किए गए बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। जापानी सरकार ने कहा कि इस तरह की सैन्य गतिविधियां न केवल जापान बल्कि पूरे पूर्वी एशिया क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शांति एवं सुरक्षा के लिए
गंभीर खतरा हैं।
जापान के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि उत्तर कोरिया लगातार बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण कर रहा है, जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का सीधा उल्लंघन है। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव बढ़ता है और आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी असर पड़ता है।
जापानी अधिकारियों ने बताया कि मिसाइल परीक्षणों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। रक्षा मंत्रालय ने अपने सुरक्षा तंत्र को सतर्क कर दिया है और संभावित खतरे को देखते हुए समुद्री तथा हवाई निगरानी बढ़ा दी गई है। जापान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने सहयोगी देशों के साथ समन्वय बनाकर स्थिति पर नजर रखे हुए है।
सरकार ने उत्तर कोरिया के समक्ष औपचारिक विरोध दर्ज कराते हुए मांग की है कि वह तुरंत ऐसे परीक्षण बंद करे और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करे। जापानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्योंगयांग की ओर से बार-बार इस तरह के कदम उठाना वैश्विक स्थिरता के लिए चिंताजनक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया के मिसाइल परीक्षणों का उद्देश्य अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करना और क्षेत्रीय राजनीति में दबाव बनाना हो सकता है। हालांकि, इससे जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे देशों की सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।
जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि देश अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। सरकार ने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर कोरिया ने कई बार मिसाइल परीक्षण किए हैं, जिनमें कुछ मिसाइलें जापान के समुद्री क्षेत्र के नजदीक गिरी थीं। इस कारण जापान बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाता रहा है।
संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने भी उत्तर कोरिया से संयम बरतने और वार्ता के रास्ते पर लौटने की अपील की है, जापान का कहना है कि क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए सभी देशों को मिलकर प्रयास करना होगा। फिलहाल दुनिया की नजरें उत्तर कोरिया की अगली प्रतिक्रिया और पूर्वी एशिया के सुरक्षा हालात पर टिकी हैं।







