विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन को व्यापार शुल्क के मोर्चे पर बड़ी राहत दी है। ट्रंप ने रूस से जुड़े कई प्रतिबंधों और शुल्कों को हटाने या उनके लागू होने से छूट देने का ऐलान किया है। उनके इस फैसले से भारत और चीन को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क को लेकर।
ट्रंप जिस कानून के तहत रूस से जुड़े देशों पर कड़े व्यापारिक कदम उठाने वाले थे, फिलहाल उसके तहत आने वाले कई प्रतिबंधों और शुल्कों को लागू करने से छूट दी गई है। इस कानून का उद्देश्य अमेरिका को व्यापारिक नुकसान से बचाना और रूस के साथ आर्थिक संबंध रखने वाले देशों पर दबाव बढ़ाना था। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी शुल्क लगाया जा सकता था, जिससे रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों को आर्थिक नुकसान होने की आशंका थी।
इस कानून के तहत रूस से ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान चर्चा में था। इस पहल के प्रमुख समर्थकों में दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम भी शामिल थे। कानून के जरिए रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसके साथ बड़े स्तर पर कारोबार करने वाले देशों को प्रतिबंधों के दायरे में लाने की कोशिश की गई थी। ऐसे में ट्रंप के ताजा फैसले को भारत और चीन के लिए महत्वपूर्ण राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
ट्रंप का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका और रूस के बीच संबंधों में हाल के दिनों में नजदीकी देखने को मिली है। दूसरी ओर, ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की भी आलोचना की है। ट्रंप रूस और यूक्रेन दोनों के राष्ट्राध्यक्षों से युद्ध समाप्त करने की अपील कर चुके हैं और दोनों पक्षों पर अलग-अलग तरीकों से दबाव भी बनाया है। हालांकि, अब तक युद्ध को पूरी तरह रोकने में सफलता नहीं मिली है।
शुक्रवार देर रात जारी किए गए कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि ग्राहम एक्ट के तहत आने वाले कुछ प्रतिबंधों, रोक और शुल्कों को लागू करने से फिलहाल छूट दी जा रही है। उन्होंने इस फैसले से संबंधित प्रमाण-पत्र कांग्रेस को सौंपे जाने की भी जानकारी दी। ट्रंप ने अपने आदेश में इस कदम को अमेरिका के राष्ट्रहित में लिया गया फैसला बताया है।
हालांकि, रूस से जुड़े प्रस्तावित शुल्कों पर यह रोक स्थायी होगी या नहीं, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ट्रंप भविष्य में परिस्थितियों और अमेरिका के हितों को देखते हुए इन शुल्कों को दोबारा लागू करने का फैसला कर सकते हैं। इसलिए मौजूदा राहत को फिलहाल अस्थायी माना जा रहा है। चीन के बाद भारत रूस से कच्चे तेल की खरीद करने वाला दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, ऐसे में रूस से ऊर्जा आयात पर किसी भी अतिरिक्त शुल्क का भारत पर सीधा असर पड़ सकता था।
क्या है ग्राहम एक्ट
ग्राहम एक्ट के जरिए अमेरिका रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों को और कड़ा करना चाहता है। इसके तहत रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने वाले देशों को आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों को इसके दायरे में लाने का प्रावधान बताया गया है। हालांकि, उन देशों को छूट मिल सकती है जो अपनी कुल घरेलू जरूरत का केवल 15 प्रतिशत तक तेल आयात करते हैं। इस व्यवस्था के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100 से 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है।







