विदेश डेस्क, ऋषि राज
मॉस्को/वॉशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की खुलकर प्रशंसा करते हुए उसे अमेरिका का एक महान और भरोसेमंद सहयोगी बताया है। ट्रंप ने कहा कि इजरायल ने बार-बार यह साबित किया है कि वह केवल अमेरिका का मित्र राष्ट्र ही नहीं, बल्कि ऐसा साझेदार है जो कठिन परिस्थितियों में भी मजबूती से खड़ा रहता है और जीतना जानता है। उनके इस बयान के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति और अमेरिका-इजरायल संबंधों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच पर जारी अपने संदेश में कहा, “चाहे लोग इजरायल को पसंद करें या नहीं, उसने खुद को अमेरिका का एक महान सहयोगी साबित किया है।” उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल ने सुरक्षा, तकनीक, रक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं और कई देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह वक्तव्य अमेरिका की पारंपरिक इजरायल समर्थक नीति को दोहराता है। अमेरिका लंबे समय से इजरायल को मध्य पूर्व में अपना सबसे करीबी सहयोगी मानता रहा है। रक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने, सैन्य तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहरे संबंध हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप के इस बयान का घरेलू राजनीतिक महत्व भी हो सकता है। अमेरिका में कई वर्ग ऐसे हैं जो इजरायल के समर्थन को विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। ऐसे में ट्रंप का यह बयान समर्थक समूहों को संदेश देने की कोशिश भी माना जा रहा है।
उधर, कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और संवेदनशील हालात के बीच ऐसे बयानों का क्षेत्रीय राजनीति पर असर पड़ सकता है। कई देशों का मानना है कि अमेरिका को संतुलित भूमिका निभाते हुए शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए। हालांकि ट्रंप ने अपने संदेश में इजरायल को मजबूत सहयोगी बताते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि अमेरिका उसके साथ खड़ा है।
इजरायल और अमेरिका के बीच वर्षों से रक्षा, व्यापार, विज्ञान, साइबर सुरक्षा और कृषि क्षेत्र में भी मजबूत सहयोग रहा है। दोनों देश कई वैश्विक मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं।
ट्रंप के ताजा बयान से यह साफ है कि अमेरिका-इजरायल संबंध भविष्य में भी वैश्विक राजनीति के केंद्र में बने रहेंगे। आने वाले समय में पश्चिम एशिया की स्थिति, अमेरिका की नीति और क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं काफी अहम मानी जा रही हैं।







