नेशनल डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक हॉस्टल और पीजी की बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई। हादसे के बाद कई छात्रों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई है। घटना करीब दोपहर 1 बजकर 30 मिनट के आसपास की बताई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल, एंबुलेंस और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीनों की मदद ली जा रही है और दमकल की 12 गाड़ियां घटनास्थल पर मौजूद हैं।
हादसे के बाद मलबे से शुरुआती तौर पर छह लोगों को बाहर निकाला गया है, बचाव दल अंदर फंसे अन्य लोगों को निकालने में जुटा है। घटना के बाद आपातकालीन वाहनों की आवाजाही सुचारु रखने के लिए इलाके में ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया है। वहीं, मौके पर जुटी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स को भी बुलाया गया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, ढही इमारत में करीब 75 बेड का पीजी संचालित हो रहा था और इसमें छात्र रह रहे थे।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष आर्यन मान ने बताया कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक इमारत में करीब 15 से 20 छात्र मौजूद थे, जबकि कुछ छात्र अब भी इमारत के अंदर फंसे हुए हैं। उन्होंने बताया कि बचाव दल अंदर मौजूद छात्रों से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है और एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंच चुकी है। आर्यन मान के अनुसार, मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों से बातचीत की गई है तथा छात्रों की मदद के लिए अन्य टीमें भी भेजी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि कुछ छात्रों को अस्पताल भी ले जाया गया है। हालांकि, बचाए गए छात्रों की मौजूदा स्थिति के बारे में तत्काल पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है।
प्रत्यक्षदर्शी एक युवक ने बताया कि उसकी दुकान घटनास्थल के पास है। उसके मुताबिक, हादसे के समय अंदर बैठे लोगों को अचानक भूकंप जैसी तेज गड़गड़ाहट सुनाई दी। बाहर निकलने पर चारों तरफ धुआं और धूल दिखाई दे रही थी और पूरी इमारत गिर चुकी थी। प्रत्यक्षदर्शी ने दावा किया कि मलबे से कुछ शव निकाले गए हैं और सांस ले रहे छह लोगों को भी बाहर निकाला गया। उसने बताया कि मलबे के अंदर से अब भी लोगों की आवाजें आ रही हैं और कुछ लोग मदद के लिए पुकार रहे हैं। साथ ही, इमारत में बेसमेंट बनाए जाने का काम चलने की बात भी कही गई।
पुलिस को इमारत गिरने की सूचना दोपहर करीब 1 बजकर 34 मिनट पर मिली। इसके बाद स्थानीय पुलिस बल, दमकल सेवा, एंबुलेंस और एनडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। प्रशासन की ओर से कहा गया है कि मलबे में कुल कितने लोग फंसे हैं, इसका सटीक आंकड़ा अभी साझा नहीं किया गया है और बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। मौके पर मौजूद टीमें लगातार मलबा हटाने और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे पर चिंता और दुख जताते हुए कहा कि सत्य निकेतन में इमारत गिरने के बाद संबंधित एजेंसियां युद्धस्तर पर बचाव अभियान चला रही हैं। उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन, एनडीआरएफ, दमकल सेवा, पुलिस, एमसीडी, कैट्स और सिविल डिफेंस की टीमें मिलकर काम कर रही हैं। एहतियात के तौर पर पास की इमारत को खाली करा लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद देने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं।
भाजपा विधायक अनिल शर्मा भी घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि अभी यह बताना मुश्किल है कि मलबे के अंदर कितने बच्चे या छात्र फंसे हैं, लेकिन छात्रों के अंदर मौजूद होने की पुष्टि हुई है। उनके मुताबिक, एनडीआरएफ और एमसीडी की टीम दो छात्रों को पहले ही बाहर निकाल चुकी है और कुछ छात्रों की ओर से अंदर से फोन भी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे संकेत मिलता है कि अभी कुछ और लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं और इसलिए बचाव अभियान जारी रखा गया है।
कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने भी घटना पर दुख जताते हुए सरकार से छात्रों और उनके परिवारों की तत्काल मदद करने तथा ऐसी घटनाओं को दोबारा रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। सत्य निकेतन दिल्ली में छात्रों के प्रमुख इलाकों में माना जाता है। इसके पास दिल्ली विश्वविद्यालय का साउथ कैंपस है और आत्माराम कॉलेज, मोतीलाल कॉलेज, वेंकटेश्वर कॉलेज, जीसस एंड मेरी कॉलेज और मैत्री कॉलेज जैसे संस्थान स्थित हैं, जिसके कारण इलाके में बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं।
फिलहाल घटनास्थल पर राहत एवं बचाव अभियान जारी है और टीमें मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।







