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देशभर में 'कार्बाइड गन' का कहर, 300 से अधिक लोगों की गईं आंखें

रिपोर्ट: वेरॉनिका राय |

देशभर में कार्बाइड गन का खतरनाक ट्रेंड: सैकड़ों बच्चे अंधेपन के शिकार, प्रशासन सख्त अलर्ट पर....

नई दिल्ली/पटना: दीपावली की खुशियों के बीच देश के कई हिस्सों में एक खतरनाक चलन ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। पटना से शुरू हुआ ‘कार्बाइड गन’ का यह जुगाड़ अब मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और बंगाल तक फैल चुका है। इस ‘देसी पटाखे’ ने देशभर में अब तक 300 से अधिक बच्चों और युवाओं की आंखों की रोशनी छीन ली है। कई अस्पतालों में बच्चों का इलाज जारी है, जबकि डॉक्टरों ने इसे “मिनी बम” बताकर सख्त चेतावनी दी है।

क्या है कार्बाइड गन, और क्यों है इतनी खतरनाक

कार्बाइड गन दो प्लास्टिक पाइपों को जोड़कर बनाई जाती है। एक पाइप में कैल्शियम कार्बाइड और पानी डाला जाता है, जिससे एसिटिलिन गैस बनती है। यह गैस अत्यधिक ज्वलनशील होती है। जब गैस लाइटर दबाया जाता है, तो विस्फोट होता है; तेज आवाज, आग की चमक और झटका बच्चों को “पटाखे जैसा मज़ा” देता है। लेकिन यही मज़ा कुछ सेकंड में आंखें, त्वचा और कान तक झुलसा देता है।

⚠️ कैसे होते हैं हादसे

अक्सर बच्चे पाइप में झांककर देखते हैं कि गैस बनी या नहीं। उसी पल विस्फोट होता है और आंखों पर सीधी लपट पड़ती है। विशेषज्ञों के अनुसार, विस्फोट के दौरान कार्बाइड के बारीक कण रेटिना और कॉर्निया को नष्ट कर देते हैं। कई मामलों में कान के परदे फटने और चेहरे के झुलसने की घटनाएं भी दर्ज हुई हैं।

देशभर के अस्पतालों में बढ़े केस

  • पटना (बिहार): 50 से अधिक बच्चे स्थायी दृष्टिहीनता का शिकार।

  • मध्य प्रदेश: 300 से ज्यादा बच्चों को आंखों और कानों की गंभीर चोटें (सरकारी रिपोर्ट के अनुसार)।

  • उत्तर प्रदेश और झारखंड: कई जिलों में इसी तरह के मामले सामने आए हैं, खासकर छोटे कस्बों में।

  • कुल अनुमान: पूरे देश में अब तक 500 से अधिक मामले, जिनमें से करीब 200 बच्चों की आंखों की रोशनी स्थायी रूप से जा चुकी है।

डॉक्टरों की चेतावनी

डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा (आईजीआईएमएस, पटना):
“कार्बाइड गन किसी पटाखे से कहीं अधिक खतरनाक है। विस्फोट के दौरान जो गैस बनती है, वह आंखों की नसों को जला देती है। कई बच्चे स्थायी रूप से अंधे हो चुके हैं।”

डॉ. निम्मी रानी (नेत्र विशेषज्ञ):
“यह एक मिनी बम की तरह है। इससे न सिर्फ आंखें बल्कि चेहरा और कान भी प्रभावित होते हैं। 10 सेकंड का रोमांच जिंदगीभर का दर्द बन सकता है।”

सोशल मीडिया से फैला जानलेवा ट्रेंड

इस ट्रेंड की जड़ें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक जाती हैं। बच्चे और किशोर YouTube, Instagram Reels और TikTok जैसे शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर इसे देखकर खुद बनाने लगे हैं। ऑनलाइन ट्यूटोरियल्स के जरिए बच्चे PVC पाइप, कैल्शियम कार्बाइड, और गैस लाइटर से यह गन घर में बना रहे हैं। सरकार के निर्देशों के बावजूद इन वीडियो को पूरी तरह हटाया नहीं गया है।

प्रशासन की कार्रवाई और चेतावनी

  • बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड में कार्बाइड गन की बिक्री और निर्माण पर रोक।

  • पुलिस और प्रशासन ने दुकानों में छापेमारी शुरू की है।

  • स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि बच्चे इस जुगाड़ गन से दूर रहें।

  • सोशल मीडिया कंपनियों से संबंधित वीडियो हटाने का अनुरोध किया गया है।

त्योहार खुशियों का, हादसों का नहीं

डॉक्टरों और प्रशासन का कहना है कि दीपावली रोशनी और खुशी का त्योहार है, न कि अस्पतालों की आपात स्थिति का। बच्चों को असली मज़ा सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से त्योहार मनाने से मिलना चाहिए, न कि खतरनाक प्रयोगों से।

कार्बाइड गन अब केवल एक “स्थानीय जुगाड़” नहीं रही, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर का जनस्वास्थ्य संकट बन चुकी है। अगर सरकार, सोशल मीडिया कंपनियाँ और अभिभावक एकजुट होकर कदम न उठाएँ, तो आने वाले त्योहारों में यह “मज़ा” सैकड़ों और आंखों की रोशनी छीन सकता है।