स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना ।
- आरसीडी की सड़कों के निर्माण में नदी, नहर, तालाब और पोखरों की सिल्ट इस्तेमाल की तैयारी
पटना, पथ निर्माण विभाग की सड़कों के निर्माण में अब नदी-नहर, तालाब, पोखर आदि जलाशयों के गाद (सिल्ट) का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे एक तरफ जहां कृषि उपजाऊ क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित होगी वहीं दूसरी ओर जलाशयों की धारण क्षमता भी बढ़ेगी। विभागीय अधिकारियों की मानें तो सड़क निर्माण की कई परियोजनाओं में जलाशयों के गाद का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया शुरू भी कर दी गई है।
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने हाल ही में संपन्न विभागीय बैठक में नदी तल एवं नहर चैनलों से निकाले गए डी-सिल्टेड सामग्री के प्रभावी उपयोग के लिए संबंधित मुख्य अभियंता (सीई) को जिला स्तर पर समन्वय स्थापित कर समिति के साथ आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही जल संसाधन विभाग से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) प्राप्त कर कार्यों को शीघ्र गति प्रदान करने के लिए कहा है।
सचिव ने बताया कि सड़कों के निर्माण में डी-सिल्टेड सामग्री के इस्तेमाल से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं में निर्माण कार्य को तेजी मिलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पटना में किमी 00 से 06 तक समग्र उद्यान, दीघा से सभ्यता द्वार और भद्र घाट से दीदारगंज (किमी 0.00 से 8.50) तक के कार्यों में डी-सिल्टेड सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इससे निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। इसी के साथ नालंदा जिले में सलेपुर से राजगीर (एनएच-82) तक 27.180 किमी लंबाई में 4-लेन ग्रीनफील्ड पर्यटक मार्ग (बौद्ध सर्किट) में भी इस सामग्री के उपयोग से कार्य में प्रगति आएगी।
बक्सर जिले में चौसा–बक्सर बाईपास (एनएच-319) के 4-लेनिंग कार्य और दरभंगा जिले में बलभद्रपुर से बेला नवादा (एनएच-119 डी) तक 4-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राष्ट्रीय राजमार्ग (भारतमाला परियोजना अंतर्गत) सहित अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं में भी इस पहल से गति आने की संभावना है। अमस–दरभंगा कॉरिडोर (पैकेज-4) जैसी प्रमुख परियोजनाएं भी इससे लाभान्वित होंगी।
नए प्रयोग से खेत और जलाशयों की सुनश्चित होगी सुरक्षा
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने बताया कि सड़क निर्माण में अक्सर कृषि उपजाऊ क्षेत्र से मिट्टी उठानी पड़ती है। इससे कृषि भूमि के क्षरण की समस्या बनती है।
समस्या से निपटने के लिए विभाग कुछ वर्ष पहले सड़क निर्माण में फ्लाइएश इस्तेमाल के प्रयोग को आजमाता रहा लेकिन फ्लाइएश की लगातार कमी बने रहने से एक बार फिर से कृषि उपजाऊ मिट्टी के कटान का दबाव बन रहा था। बढ़ती हुई आबादी और कृषि उपजाऊ क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभाग ने नदी, नहर, तालाब, पोखरों के डी-सिल्टेड सामग्री को सड़क निर्माण में इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। इससे नदी, तालाब, नहर आदि जलाशयों की धारक क्षमता में जहां वृद्धि वहीं खेतों की सिंचाई में सहूलियत बढ़ने के साथ-साथ ग्राउंड वाटर रिचार्ज का मार्ग प्रशस्त होगा







