नेशनल डेस्क, शुभम कुमार तिवारी।
कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान में सितंबर से जारी विवाद के बीच अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने प्रदर्शनकारी छात्रों का समर्थन किया है। भाजपा नेता केया घोष ने उनके बयान की आलोचना की है, जबकि संस्थान प्रशासन ने सुरक्षा और अनुशासन को लेकर अपनी कार्रवाई का बचाव किया है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (SRFTI) में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। परिसर में हुई झड़पों, छात्रों की सुरक्षा, प्रशासन की कार्रवाई और शैक्षणिक गतिविधियों के निलंबन को लेकर मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में बयान जारी करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर असहमति रखने वाले लोगों के खिलाफ बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया है। वहीं, भाजपा नेता केया घोष ने शाह की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है। इस विवाद ने छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक और वैचारिक टकराव को और तेज कर दिया है।
नसीरुद्दीन शाह ने छात्रों के समर्थन में क्या कहा?
नसीरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में SRFTI के प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रति एकजुटता जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद पार्टी उन लोगों को निशाना बना रही है, जो उसकी विचारधारा और नीतियों से सहमत नहीं हैं।
शाह के मुताबिक, संस्थान के छात्र प्रशासन से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, उन पर निगरानी रखी गई, उन्हें धमकियों का सामना करना पड़ा और छात्रावास खाली करने के लिए भी कहा गया। उन्होंने इन कार्रवाइयों को छात्रों को डराने या उनकी सोच को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में पेश किया।
अभिनेता ने कहा कि फिल्म संस्थान के छात्र भविष्य के फिल्मकार हैं और वे आगे चलकर अपने समाज, देश तथा मौजूदा परिस्थितियों को अपनी फिल्मों के माध्यम से सामने रखेंगे। उन्होंने नागरिकों से छात्रों की मांगों का समर्थन करने की अपील भी की।
हालांकि, शाह की टिप्पणियां उनके अपने आकलन और आरोपों पर आधारित हैं। इन आरोपों को लेकर संस्थान प्रशासन का पक्ष भी महत्वपूर्ण है, जो परिसर में सुरक्षा, अनुशासन और शैक्षणिक माहौल बहाल करने को अपनी प्राथमिकता बता रहा है।
केया घोष ने शाह की टिप्पणियों पर जताई आपत्ति
भाजपा नेता केया घोष ने शाह के बयान की आलोचना करते हुए उनके राजनीतिक दृष्टिकोण पर सवाल उठाए। ANI की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने शाह की टिप्पणियों को लेकर आपत्ति जताई और पश्चिम बंगाल में संस्थान से जुड़े विवाद पर भाजपा के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का विरोध किया।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब SRFTI में छात्र आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर पहले से तनाव बना हुआ है। शाह के बयान ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ प्रदर्शनकारी छात्र परिसर में हुई घटनाओं की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि संस्थान में सुरक्षा और सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां बहाल करना आवश्यक है।
इस पूरे मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि परिसर में हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच किस तरह आगे बढ़ती है और छात्रों की सुरक्षा तथा पढ़ाई को सामान्य बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
27 सितंबर को कैसे शुरू हुआ विवाद?
SRFTI में तनाव की शुरुआत 27 सितंबर 2026 को हुई घटना से जुड़ी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, संस्थान के मुख्य सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों और अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) से जुड़े लोगों के बीच झड़प हो गई थी। ABGP को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध संगठन के रूप में बताया गया है।
घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग आरोप सामने आए। छात्रों ने आरोप लगाया कि बाहर से आए लोगों ने परिसर में घुसकर उनके साथ मारपीट की और पथराव किया। दूसरी ओर, ABGP से जुड़े लोगों ने अपने कार्यक्रम में बाधा डालने तथा अपने बैनर को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए।
इस घटना में कई लोगों के घायल होने की खबर आई थी। मामले में पुलिस ने तीन प्राथमिकी (FIR) दर्ज कीं। इनमें पुलिस की ओर से दर्ज मामला भी शामिल था, जबकि अन्य शिकायतें संस्थान और ABGP की ओर से की गई थीं।
घटना की जांच के लिए पश्चिम बंगाल सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) गठित किया। जांच का उद्देश्य 27 सितंबर को हुई हिंसा और उससे जुड़े आरोपों की पड़ताल करना था। इसलिए इस मामले में किसी एक पक्ष के आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय जांच और संबंधित पक्षों के बयानों को ध्यान में रखना जरूरी है।
4 अक्टूबर को फिर बिगड़े हालात
27 सितंबर की घटना के बाद संस्थान परिसर में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। 4 अक्टूबर को संस्थान के मुख्य द्वार के पास बाहर से आए लोगों का एक समूह जमा हुआ। SRFTI प्रशासन ने आरोप लगाया कि इस जमावड़े के कारण परिसर की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई और माहौल बिगड़ा।
संस्थान ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि पुलिस के हस्तक्षेप से स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली। प्रशासन के अनुसार, संबंधित अधिकारियों के पास औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई गई। संस्थान ने परिसर के मुख्य द्वार और बाहरी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कदम उठाने की बात कही।
छात्रों का पक्ष इससे अलग रहा है। प्रदर्शनकारी छात्र परिसर में हुई घटनाओं के लिए जवाबदेही तय करने और यह सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उनका कहना है कि केवल सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए।
इसी अंतर के कारण विवाद का समाधान आसान नहीं हो पा रहा है। जहां प्रशासन सुरक्षा और अनुशासन को प्राथमिकता दे रहा है, वहीं आंदोलनकारी छात्र घटनाओं की जांच और जवाबदेही पर जोर दे रहे हैं।
कुलपति के इस्तीफे की मांग पर अड़े छात्र
विवाद के बाद छात्रों ने संस्थान के कुलपति संतोष अजमेरा के कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, छात्र 12 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में परिसर में हुई घटनाओं की जवाबदेही तय करना और कुलपति के इस्तीफे की मांग शामिल है।
छात्रों का आरोप है कि परिसर में लगातार तनावपूर्ण घटनाएं हुईं और प्रशासन उनकी सुरक्षा संबंधी चिंताओं का पर्याप्त समाधान नहीं कर पाया। वे चाहते हैं कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो तथा जिन लोगों की भूमिका सामने आए, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
दूसरी ओर, संस्थान प्रशासन का कहना है कि किसी भी शैक्षणिक परिसर में हिंसा, धमकी या अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जा सकती। प्रशासन ने छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों को फिर से सामान्य बनाने को अपनी जिम्मेदारी बताया है।
इस प्रकार, आंदोलन केवल एक घटना के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है। अब यह संस्थान के प्रशासनिक फैसलों, परिसर की सुरक्षा और छात्रों की शिकायतों के निपटारे से भी जुड़ गया है।
13 नवंबर तक नियमित शैक्षणिक गतिविधियां निलंबित
तनावपूर्ण माहौल के बीच SRFTI प्रशासन ने 16 अक्टूबर को एक नोटिस जारी कर फिल्म तथा इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया विभागों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियां 13 नवंबर 2026 तक निलंबित करने की घोषणा की। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों को 24 घंटे के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश भी दिया गया था।
यह फैसला छात्रों की पढ़ाई और संस्थान के दैनिक कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण है। फिल्म एवं टेलीविजन की पढ़ाई में कक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, शूटिंग, संपादन, उपकरणों का इस्तेमाल और सामूहिक परियोजनाएं भी अहम होती हैं। ऐसे में लंबे समय तक शैक्षणिक गतिविधियां बाधित रहने से छात्रों के प्रशिक्षण और शैक्षणिक कार्यक्रम पर असर पड़ने की आशंका है।
प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने की जरूरत से जोड़ा है। वहीं, विरोध कर रहे छात्रों का कहना है कि उनकी सुरक्षा और शिकायतों से जुड़े मूल सवालों का समाधान किए बिना सामान्य स्थिति बहाल करना मुश्किल होगा।
इस बीच छात्र आंदोलन जारी रहने और संस्थान में सामान्य गतिविधियां बाधित रहने से यह सवाल भी उठ रहा है कि प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत के जरिए कोई व्यावहारिक समाधान कब निकलेगा।
संस्थान प्रशासन ने क्या कहा?
SRFTI प्रशासन ने 5 अक्टूबर को जारी बयान में 4 अक्टूबर की घटना पर चिंता जताई थी। संस्थान ने कहा कि परिसर के मुख्य द्वार के पास बाहर से आए लोगों के समूह ने व्यवधान पैदा किया, जिससे सुरक्षा का माहौल प्रभावित हुआ। प्रशासन ने घटना की शिकायत संबंधित अधिकारियों से करने और पुलिस के साथ सहयोग करने की बात कही।
संस्थान ने यह भी कहा कि छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परिसर के प्रवेश द्वारों तथा बाहरी हिस्सों की सुरक्षा मजबूत की जा रही है। कुलपति संतोष अजमेरा ने छात्रों की सुरक्षा, सम्मान, कल्याण और शैक्षणिक भविष्य को संस्थान की प्राथमिकता बताया।
प्रशासन के अनुसार, संस्थान का उद्देश्य छात्रों को भयमुक्त माहौल में अपनी पढ़ाई और रचनात्मक कार्य जारी रखने का अवसर देना है। उसने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग किया जा रहा है और मामले में नियमानुसार प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
प्रशासन के इस पक्ष और छात्रों की शिकायतों के बीच मुख्य चुनौती यह है कि सुरक्षा तथा अनुशासन सुनिश्चित करते हुए पढ़ाई को जल्द सामान्य कैसे किया जाए और विवाद से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच कैसे पूरी हो।
फिल्म जगत से भी मिला छात्रों को समर्थन
SRFTI विवाद पर फिल्म जगत की कुछ हस्तियों ने भी प्रतिक्रिया दी है। नसीरुद्दीन शाह के अलावा फिल्मकार पायल कपाड़िया ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रति समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने छात्रों पर कार्रवाई और परिसर में हुई कथित हिंसा को लेकर चिंता जताई।
फिल्म संस्थानों में छात्रों के विरोध प्रदर्शन का मामला केवल परिसर के अनुशासन तक सीमित नहीं रहता, क्योंकि यहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, रचनात्मक सोच, सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही जैसे सवाल भी जुड़े होते हैं। इसी वजह से SRFTI का विवाद फिल्म जगत और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि, किसी भी पक्ष का समर्थन करने वाले सार्वजनिक बयानों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है। मामले में छात्रों, प्रशासन और संबंधित संगठनों के आरोपों की स्वतंत्र जांच ही घटनाओं की जिम्मेदारी स्पष्ट करने में मदद कर सकती है।
अब आगे क्या होगा?
SRFTI विवाद में फिलहाल तीन बड़े सवाल बने हुए हैं: 27 सितंबर और 4 अक्टूबर की घटनाओं के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है, छात्रों की सुरक्षा और प्रशासन के खिलाफ उनकी शिकायतों का समाधान कैसे किया जाता है, और नियमित शैक्षणिक गतिविधियां कब बहाल होती हैं।
नसीरुद्दीन शाह के बयान और भाजपा नेताओं की प्रतिक्रियाओं ने विवाद को राजनीतिक रंग जरूर दिया है, लेकिन संस्थान के छात्रों के लिए सबसे तात्कालिक मुद्दा पढ़ाई, सुरक्षा और परिसर में सामान्य माहौल की बहाली है। प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद, जांच की निष्पक्षता और स्पष्ट निर्णय इस गतिरोध को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल, इस मामले में राजनीतिक आरोपों के बीच संस्थान की जांच, प्रशासनिक फैसलों और छात्रों की मांगों पर होने वाली अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।






