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नाबालिग की जबरन शादी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

नेशनल डेस्क, वेरोनिका राय |

नाबालिग की जबरन शादी का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, लड़की को दी जाए सुरक्षा: कोर्ट का बड़ा आदेश, ससुराल वालों पर गंभीर आरोप, पढ़ाई और आज़ादी की मांग कर रही लड़की को जान का खतरा
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक नाबालिग लड़की की याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) और दिल्ली पुलिस आयुक्त को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता लड़की और उसके साथ फरार उसके मित्र को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए। कोर्ट ने कहा कि लड़की की जान को गंभीर खतरा है और अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे उनसे संपर्क कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएं।


यह मामला एक नाबालिग लड़की से जुड़ा है, जिसने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया कि 9 दिसंबर 2024 को जब उसकी उम्र महज साढ़े 16 साल थी, तब उसकी जबरन शादी कर दी गई। याचिका के अनुसार, शादी के बाद से ही उसके ससुराल वाले उस पर दबाव बना रहे हैं कि वह इस विवाह को निभाए और बच्चे को जन्म दे। लड़की का कहना है कि उसकी मर्जी के खिलाफ न केवल शादी कराई गई, बल्कि अब उसके सपनों और स्वतंत्रता को भी कुचलने की कोशिश हो रही है।

पीड़िता ने कोर्ट में बताया कि वह आगे पढ़ाई करना चाहती है और अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहती है, लेकिन उसके ससुराल वालों ने उसे न केवल पढ़ाई से रोक दिया बल्कि अपने मायके लौटने की इजाजत भी नहीं दी। इतना ही नहीं, ससुराल पक्ष ने दावा किया कि उन्होंने इस शादी में काफी पैसा खर्च किया है, इसलिए अब लड़की को उनका 'ऋण' चुकाना चाहिए।


लड़की ने अपनी याचिका में यह भी दावा किया कि वह अब ससुराल की प्रताड़ना से तंग आकर अपने एक दोस्त के साथ फरार हो गई है और दोनों किसी सुरक्षित जगह पर रह रहे हैं। लेकिन उसे डर है कि अगर वह बिहार वापस लौटती है, तो उसकी और उसके दोस्त की जान को खतरा हो सकता है। ऐसे में लड़की ने कोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाई।


इस गंभीर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि लड़की को पूरी सुरक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लड़की की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए दिल्ली पुलिस आयुक्त और बिहार के पुलिस महानिदेशक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। पीठ ने स्पष्ट किया कि अगर किसी प्रकार की लापरवाही हुई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

साथ ही कोर्ट ने बिहार प्रशासन, लड़की के पति और ससुराल वालों को नोटिस जारी करते हुए 15 जुलाई 2025 तक इस मामले पर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।


यह मामला ना केवल एक लड़की की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा है, बल्कि बाल विवाह, जबरन शादी और महिलाओं के अधिकार जैसे बड़े सामाजिक मुद्दों को भी उजागर करता है। सुप्रीम कोर्ट की इस पहल को महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने सराहा है और इसे एक साहसी लड़की की जीत बताया है।

इस केस से यह साफ हो गया है कि आज भी समाज के कई हिस्सों में लड़कियों की मर्जी को ताक पर रखकर उनके जीवन के बड़े फैसले लिए जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इस दिशा में एक बड़ी उम्मीद की किरण है, जो न केवल इस लड़की को सुरक्षा देगा बल्कि बाल विवाह और महिला उत्पीड़न के खिलाफ कड़ा संदेश भी देगा।