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नीतीश का चुनावी मास्टरस्ट्रोक: बढ़ी पेंशन, 20 में भोजन, पंचायतों में मंडप

स्टेट डेस्क, वेरोनिका राय ।

बिहार में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। हर राजनीतिक दल रणनीति गढ़ने में जुटा है, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने ही अंदाज़ में मैदान में उतर चुके हैं। उन्होंने जनकल्याण की योजनाओं की झड़ी लगाकर विपक्ष को चौंका दिया है और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। हाल के दिनों में उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनका सीधा असर करोड़ों लोगों की ज़िंदगी पर पड़ेगा। इन फैसलों को राजनीतिक गलियारों में ‘चुनावी मास्टरस्ट्रोक’ के तौर पर देखा जा रहा है।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन में जबरदस्त बढ़ोतरी

नीतीश सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बड़ा इजाफा करते हुए राशि को ₹400 से बढ़ाकर ₹1100 प्रति माह कर दिया है। इस योजना का लाभ वृद्धजन, दिव्यांगजन और विधवा महिलाओं को मिलेगा। यह नई राशि जुलाई से ही लागू हो जाएगी। इस बढ़ोतरी से कुल 1 करोड़ 9 लाख 69 हजार 255 लाभार्थियों को सीधा फायदा पहुंचेगा। इस कदम ने नीतीश कुमार को गरीब तबकों में और लोकप्रिय बना दिया है।

पंचायती राज प्रतिनिधियों को अधिक ताकत

मुख्यमंत्री ने पंचायती राज प्रतिनिधियों की भूमिका को और सशक्त बनाने की दिशा में 6 महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। ग्राम पंचायतों के मुखिया को अब मनरेगा योजना के तहत ₹10 लाख तक की प्रशासनिक स्वीकृति देने का अधिकार होगा, जो पहले ₹5 लाख था। इसके अलावा सभी स्तर के पंचायती राज प्रतिनिधियों का मासिक भत्ता डेढ़ गुना बढ़ा दिया गया है।

साथ ही, अब ये जनप्रतिनिधि 'मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष' के अंतर्गत 16 प्रकार के इलाज सरकारी सहायता से करवा सकेंगे। इससे उनका स्वास्थ्य सुरक्षा कवच भी मजबूत होगा।

हर पंचायत में बनेगा विवाह मंडप

गरीब परिवारों को बेटी की शादी के लिए अब जगह की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। सरकार ने प्रत्येक पंचायत में एक भव्य विवाह मंडप बनाने की योजना को मंजूरी दी है। प्रत्येक मंडप पर ₹50 लाख खर्च होंगे और इसके लिए कुल ₹4026.5 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। यह फैसला सामाजिक प्रतिष्ठा और सुविधा दोनों को बढ़ाएगा।

जीविका समूहों को बड़ी राहत

राज्य में 1.35 करोड़ महिला सदस्यों वाले 10.5 लाख स्वयं सहायता समूहों की ऋण सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख कर दी गई है। अब ये समूह सिर्फ 7% ब्याज दर पर लोन ले सकेंगे, जिसमें अतिरिक्त ब्याज की राशि राज्य सरकार वहन करेगी। इसके साथ ही जीविका से जुड़े कर्मियों का मानदेय भी दोगुना कर दिया गया है, जिससे लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा।

20 रुपये में मिलेगा भरपेट भोजन

‘दीदी की रसोई’ योजना को अब प्रखंड, अनुमंडल, अंचल कार्यालय और सभी मेडिकल कॉलेजों में विस्तार दिया जाएगा। इसके तहत सिर्फ ₹20 में स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन उपलब्ध होगा। यह योजना खासकर गरीबों, कामकाजी वर्ग और छात्रों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।

पुनौराधाम का होगा अयोध्या की तर्ज पर विकास

मुख्यमंत्री की योजनाओं में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का विकास भी शामिल है। सीतामढ़ी के पुनौराधाम—माता जानकी की जन्मस्थली—के समग्र विकास के लिए ₹882.87 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसे अयोध्या की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि इसका शिलान्यास अगस्त तक हो जाना चाहिए। यह कदम धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा और स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराएगा।

नीतीश कुमार ने चुनावी माहौल बनने से पहले ही एक के बाद एक जनहितकारी फैसले लेकर यह संदेश दे दिया है कि उनका फोकस सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास है। पेंशन में बढ़ोतरी, पंचायतों का सशक्तिकरण, महिलाओं को आर्थिक आज़ादी और धार्मिक स्थलों का कायाकल्प—इन सबका समन्वय एक दूरदर्शी नेतृत्व की झलक देता है। अब देखना ये है कि इन योजनाओं का कितना असर चुनावी नतीजों पर पड़ेगा, लेकिन फिलहाल तो नीतीश सरकार का यह कदम बिहार की सियासत में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।