विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
नई दिल्ली। दुनिया से जुड़ने और संवाद करने के तरीकों में बदलाव लाने के उद्देश्य से एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक दो नई तकनीकों पर काम कर रही है। इनमें पहली तकनीक ‘ब्लाइंडसाइट’ है, जिसका उद्देश्य दृष्टिहीन लोगों को देखने में मदद करना है। वहीं, दूसरी तकनीक ‘टेलीपैथी’ के माध्यम से लोग बिना हाथों का इस्तेमाल किए केवल अपने विचारों से कंप्यूटर चला सकेंगे और संवाद कर पाएंगे। मस्क के अनुसार, ब्लाइंडसाइट तकनीक का विकास पूरा हो चुका है और अब इसे इस्तेमाल में लाने के लिए नियामकीय मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इन दोनों तकनीकों की कार्यप्रणाली और उनकी संभावनाओं के बारे में जानकारी साझा की है।
मस्क ने बताया कि ब्लाइंडसाइट एक प्रयोगात्मक ब्रेन इम्प्लांट तकनीक है, जिसे विशेष रूप से दृष्टिहीन लोगों की सहायता के लिए विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य कैमरे के माध्यम से आसपास के वातावरण की दृश्य जानकारी एकत्र करना और उसे सीधे मस्तिष्क तक पहुंचाना है। इस प्रक्रिया में कैमरा आसपास मौजूद वस्तुओं और दृश्यों को कैप्चर करेगा। इसके बाद प्राप्त जानकारी वायरलेस तकनीक के जरिए मस्तिष्क में लगाए गए विशेष इम्प्लांट तक भेजी जाएगी। इस तरह आंखों के बजाय तकनीकी उपकरणों की मदद से दृश्य संबंधी सूचनाएं मस्तिष्क तक पहुंचाने की व्यवस्था तैयार की गई है।
इस तकनीक में मस्तिष्क के उस हिस्से को सक्रिय करने की कोशिश की जाएगी, जो देखने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। इसके लिए मस्तिष्क में लगाए गए इम्प्लांट के माध्यम से दृश्य संकेत पहुंचाए जाएंगे। कंपनी का उद्देश्य ऐसी स्थिति में भी देखने की क्षमता विकसित करने की संभावना तलाशना है, जब किसी व्यक्ति की आंखें या दृष्टि तंत्रिका सामान्य रूप से काम नहीं कर रही हों। इस तकनीक के जरिए कैमरे से प्राप्त जानकारी को मस्तिष्क के लिए उपयोगी संकेतों में बदलने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि, यह तकनीक अभी प्रयोगात्मक चरण में है और इसके वास्तविक परिणामों का व्यापक स्तर पर परीक्षण होना बाकी है।
मस्क का दावा है कि ब्लाइंडसाइट तकनीक भविष्य में उन लोगों के लिए भी मददगार साबित हो सकती है, जो जन्म से ही दृष्टिहीन हैं। इसका उद्देश्य केवल उन लोगों की सहायता करना नहीं है, जिन्होंने किसी बीमारी या दुर्घटना के कारण अपनी आंखों की रोशनी खो दी है, बल्कि जन्म से दृष्टिहीन व्यक्तियों के लिए भी देखने की संभावनाएं तलाशना है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक इंसानों में इस तकनीक के इस्तेमाल से दृष्टि बहाल होने का प्रदर्शन नहीं किया है। फिलहाल इसका तकनीकी विकास पूरा होने का दावा किया गया है, लेकिन इसे आम लोगों तक पहुंचाने से पहले संबंधित नियामक संस्थाओं की अनुमति आवश्यक होगी।
न्यूरालिंक की दूसरी प्रमुख तकनीक ‘टेलीपैथी’ है, जिसका उद्देश्य इंसान के मस्तिष्क के संकेतों को डिजिटल निर्देशों में बदलना है। इस तकनीक में मस्तिष्क के भीतर एक छोटा इम्प्लांट लगाया जाता है, जिसमें मौजूद इलेक्ट्रोड तंत्रिका संकेतों को पहचानते हैं। इसके बाद इन संकेतों को कंप्यूटर के समझने योग्य निर्देशों में परिवर्तित किया जाता है। इसकी मदद से व्यक्ति बिना हाथों का इस्तेमाल किए कंप्यूटर स्क्रीन पर कर्सर चला सकता है, किसी विकल्प पर क्लिक कर सकता है और टाइपिंग भी कर सकता है। यानी कंप्यूटर चलाने के लिए की-बोर्ड और माउस की जरूरत कम करने की दिशा में यह तकनीक विकसित की जा रही है।
टेलीपैथी तकनीक को विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है, जो लकवे या अन्य शारीरिक समस्याओं के कारण अपने हाथ-पैरों को आसानी से हिला नहीं सकते। ऐसे लोगों को रोजमर्रा के काम करने और दूसरे व्यक्तियों के साथ संवाद स्थापित करने में काफी परेशानी होती है। न्यूरालिंक की यह तकनीक मस्तिष्क से मिलने वाले संकेतों के आधार पर उन्हें डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करने की सुविधा देने का प्रयास करती है। कंपनी के परीक्षणों में कुछ प्रतिभागी इस तकनीक की मदद से कंप्यूटर चलाने और वीडियो गेम खेलने में सफल रहे हैं। इससे शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए तकनीक के जरिए संवाद और डिजिटल गतिविधियों में भागीदारी की नई संभावनाएं सामने आई हैं।
इस तरह न्यूरालिंक की ब्लाइंडसाइट और टेलीपैथी तकनीक चिकित्सा और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में नए प्रयोगों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। जहां ब्लाइंडसाइट का लक्ष्य दृष्टिहीन लोगों तक दृश्य संबंधी जानकारी पहुंचाना है, वहीं टेलीपैथी का उद्देश्य केवल सोचने के जरिए डिजिटल उपकरणों को नियंत्रित करना है। मस्क के मुताबिक, ब्लाइंडसाइट तकनीकी रूप से तैयार है और अब नियामकीय मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहा है। हालांकि, इन तकनीकों की वास्तविक उपयोगिता और सुरक्षा का आकलन इनके मानव परीक्षणों और आगे मिलने वाले परिणामों के आधार पर ही किया जा सकेगा।







