विदेश डेस्क, आर्या कुमारी।
अटलांटा। अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कई यूरोपीय देशों के राजनयिकों ने लावरोव के साथ समूह तस्वीर खिंचवाने पर आपत्ति जताई और विरोध स्वरूप फोटो सेशन से बाहर रहने की चेतावनी दी। राजनयिकों के इस रुख के बाद आयोजकों को ग्रुप फोटो सेशन रद करना पड़ा। बैठक में रूस और चीन समेत दुनिया की 20 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस घटनाक्रम से स्पष्ट हो गया कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर जी-20 देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
दो दिवसीय विदेश मंत्रियों की इस बैठक की अध्यक्षता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो कर रहे हैं। बैठक शुक्रवार और शनिवार को आयोजित की जा रही है। इसमें शामिल होने के लिए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी अटलांटा पहुंच चुके हैं। यह बैठक दिसंबर में मियामी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मेजबानी में होने वाले जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विदेश मंत्रियों की बैठक में विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा के साथ उन मुद्दों पर सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिनका असर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और व्यापार पर पड़ रहा है।
बैठक के दौरान कई ऐसे संवेदनशील मुद्दे सामने हैं, जिन पर जी-20 देशों के बीच एकमत होना मुश्किल माना जा रहा है। इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का सैन्य अभियान, अमेरिकी आयात शुल्क और दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियां प्रमुख हैं। इन अंतरराष्ट्रीय तनावों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्षों के कारण ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता भी बढ़ी है। ऐसे में बैठक के दौरान इन विवादों पर चर्चा और देशों के बीच मतभेद कम करने की कोशिश की जा रही है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस बैठक में उनकी प्रमुख प्राथमिकता समुद्री मार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर देशों के बीच मौजूद मतभेदों को दूर करना है। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर, काला सागर और दक्षिण चीन सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों पर विशेष रूप से चर्चा होगी। इन मार्गों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन में अहम योगदान है। चर्चा के दौरान ईरान से जुड़े तनाव, रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण काला सागर में पैदा हुई चुनौतियों और चीन तथा उसके छोटे पड़ोसी देशों के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर जारी विवादों पर भी विचार किया जाएगा।
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि जी-20 के कुछ सदस्य देशों ने यूक्रेन पर रूस के हमले तेज होने के बीच मॉस्को को बैठक में आमंत्रित किए जाने पर चिंता जताई है। अटलांटा में रूस की ओर से विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनके साथ ग्रुप फोटो खिंचवाने को लेकर यूरोपीय राजनयिकों की आपत्ति इसी असहमति को दर्शाती है। फोटो सेशन से हटने की चेतावनी के बाद कार्यक्रम रद होने से बैठक के शुरुआती दौर में ही रूस को लेकर देशों के बीच राजनीतिक मतभेद उजागर हो गए। इससे दिसंबर में होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की चुनौती भी सामने आई है।
इस बैठक पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान के खिलाफ अमेरिका की ओर से संभावित नए सैन्य अभियान की आशंका का भी असर दिखाई दे रहा है। जी-20 के सदस्य सऊदी अरब समेत क्षेत्र के कई देश इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने पश्चिम एशिया के कई देशों और अपने क्षेत्रीय सहयोगियों को संभावित परिस्थितियों के लिए तैयार रहने को कहा है। उन्हें आशंका जताई गई है कि अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर नए हमले किए जा सकते हैं और इसके जवाब में ईरान भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
ऐसे में अटलांटा में हो रही जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक केवल आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें वैश्विक सुरक्षा और क्षेत्रीय संघर्षों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान के साथ बढ़ता तनाव, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और चीन की गतिविधियां प्रमुख चर्चा के विषय हैं। वहीं, रूसी विदेश मंत्री के विरोध में ग्रुप फोटो सेशन रद होने की घटना ने यह भी दिखा दिया है कि अंतरराष्ट्रीय संकटों को लेकर सदस्य देशों के बीच राजनीतिक दूरी अब भी बनी हुई है।






