नेशनल डेस्क, नीतीश कुमार।
काठमांडू। नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, शुक्रवार दोपहर 3 बजे तक 547 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें रसुवा के अलावा नदी के निचले इलाकों में मिले शव भी शामिल हैं।
रसुवा से नवलपरासी तक मिले शव
अधिकारियों के मुताबिक, रसुवा में 13, नुवाकोट में 38, धादिंग में 40, चितवन में 221, गोरखा में 44, तनहुं में 29, नवलपरासी पूर्व में 134 और नवलपरासी पश्चिम में 28 शव बरामद किए गए हैं। इस तरह कुल मृतकों की संख्या 547 हो गई है।
हालांकि, यह आंकड़ा अंतिम नहीं माना जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं और अलग-अलग जिलों से मिले आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है। लापता लोगों की तलाश भी लगातार जारी है।
बाढ़ का मलबा कई जिलों तक पहुंचा
भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई प्रलयंकारी बाढ़ लोगों और मलबे को काफी दूर तक बहाकर ले गई। इसके कारण राहत और शव बरामदगी का अभियान रसुवा से आगे बढ़कर नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहूं, चितवन और नवलपरासी तक पहुंच गया है।
चितवन में शव रखने की जगह की कमी
चितवन में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बनी हुई है। शुक्रवार दोपहर तक वहां 221 शव बरामद हो चुके थे, जबकि जिले के अस्पतालों के शवगृहों में कुल मिलाकर सिर्फ 30 से 50 शव रखने की क्षमता है।
ऐसे में भरतपुर स्थित औद्योगिक उद्यम विकास संस्थान की खाली इमारत को अस्थायी शवगृह में बदला जा रहा है। यहां करीब 250 शव रखे जा सकेंगे। भरतपुर महानगरपालिका इसकी मरम्मत और जरूरी व्यवस्था कर रही है। वहीं, स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने सूखी बर्फ उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है।
नवलपरासी पूर्व और पोखरा में भी बढ़ा दबाव
नवलपरासी पूर्व में भी शव रखने की समस्या सामने आई है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में जगह नहीं होने के कारण कुछ शव पोखरा, बुटवल, भैरहवा और पाल्पा भेजे गए हैं। कावासोती में एक सामुदायिक वन सभागार को भी अस्थायी शवगृह बनाया गया है।
पोखरा भी निचले इलाकों से बरामद शवों का प्रमुख केंद्र बन गया है। अधिकारियों ने तनहूं, गोरखा, नवलपरासी पूर्व और धादिंग से 93 शव पोखरा पहुंचाए हैं। कास्की के अस्पतालों में शव रखने की कुल क्षमता 88 है, जिससे वहां भी दबाव बढ़ गया है।
977 लोग अब भी लापता
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 977 लोग अब भी लापता हैं। इनमें 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, आपदा के दौरान संपर्क से बाहर हुए 28 पुलिसकर्मियों का भी अभी तक पता नहीं चल पाया है।
लापता लोगों में स्थानीय नागरिकों के साथ पर्यटक, पर्वतारोही और यात्री भी शामिल हैं। अधिकारी यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि इनमें से कुछ लोग सुरक्षित स्थानों तक पहुंच चुके हैं या नहीं।
117 विदेशी पर्यटकों को बचाया गया
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, रसुवा के बाढ़ प्रभावित इलाकों से 117 विदेशी पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें 85 भारतीय, 16 चीनी, नौ दक्षिण कोरियाई, दो अमेरिकी और दो इतालवी नागरिक शामिल हैं। तीन अन्य पर्यटकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि की जा रही है।
दुर्गम इलाकों से लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, सुरक्षा बल जमीन पर बस्तियों और नदी किनारे के क्षेत्रों में तलाशी अभियान चला रहे हैं। नेपाल पुलिस के 4,400 से अधिक जवानों के अलावा नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल भी राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं।
1,473 लोगों को बचाया या प्राथमिक सहायता दी
नेपाल पुलिस के अनुसार, नुवाकोट, रसुवा और धादिंग में सुरक्षा बलों ने 1,473 लोगों को बचाया या प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई है।
बाढ़ के कारण सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से कई इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। ऐसे में कुछ स्थानों पर बचाव अभियान के लिए हेलीकॉप्टर ही प्रमुख साधन बने हुए हैं।
अधिकारियों ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। बाढ़ के दो दिन बाद भी आपदा की पूरी तस्वीर सामने नहीं आई है। 547 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, 977 लोग अब भी लापता हैं और राहत-बचाव अभियान जारी है।






