स्टेट डेस्क डेस्क, नीतीश कुमार।
काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह अचानक आई बाढ़ ने रसुवा जिले में भारी तबाही मचा दी। सुबह करीब 9 बजे तिब्बत की दिशा से भोटेकोशी नदी में अचानक तेज पानी आया, जिसकी चपेट में कई इलाके आ गए।
नेपाली मीडिया के मुताबिक, अब तक 55 लोगों की मौत की खबर है। नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार 500 से ज्यादा लोग लापता हैं। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक शामिल हैं।
इधर, उत्तर प्रदेश के बहराइच में नेपाल की ओर से तेज बहाव में बहकर 5 जंगली हाथी घाघरा बैराज तक पहुंच गए। झुंड में 3 बच्चे भी शामिल हैं।
नेपाली अधिकारियों ने एक बार फिर बाढ़ का खतरा जताया है। एक अधिकारी के मुताबिक, जिस ग्लेशियल झील के फटने से अचानक बाढ़ आई थी, वहां अभी भी करीब 7 मीटर ऊंचा पानी का बांध बना हुआ है। इसके कभी भी टूटने की आशंका है।
बाढ़ की वजह क्या बताई जा रही है?
शुरुआती वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक, ल्हेंदे नदी में बर्फ और पत्थरों का बड़ा हिस्सा गिरने से नदी का रास्ता रुक गया और पानी जमा होने लगा।
बाद में यह रुकावट टूट गई और जमा पानी तेज गति से नीचे की ओर बहने लगा। इससे अचानक फ्लैश फ्लड की स्थिति बनी। ग्लेशियल झील के फटने यानी GLOF की संभावना की भी जांच की जा रही है। उस समय रसुवा में तेज बारिश नहीं हुई थी।
हालांकि, बाढ़ की वजह भूकंप को भी बताया जा रहा है। सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। बाढ़ भी इसी समय के आसपास आई, इसलिए दोनों के बीच संभावित संबंध की जांच की जा रही है।
रसुवा से चितवन तक बाढ़ का असर
बाढ़ का असर रसुवा से नुवाकोट और धादिंग होते हुए चितवन तक देखा गया। रसुवा में टिमुरे, स्याफ्रुबेसी, हाकुबेसी, मेलुंग, सल्लेटार, शांतिबाजार, पैरेबेसी, खाल्टी बस्ती और बेत्रावती समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं।
बाढ़ धादिंग के गल्छी तक पहुंच गई और आगे मुग्लिन की ओर बढ़ने की चेतावनी दी गई है।
बेत्रावती से रसुवागढ़ी-तिब्बत सीमा तक करीब 42 किलोमीटर सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है। इसके अलावा स्याफ्रुबेसी से सीमा तक 16 किलोमीटर सड़क को भी नुकसान पहुंचा है।
बिहार में भी बाढ़ का खतरा
भारत में इसका असर मुख्य रूप से बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी छोटी-बड़ी नदियों में दिखने की आशंका है। नेपाल से करीब 3 मीटर ऊंची बाढ़ की लहर आने का अलर्ट है।
पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में खास सतर्कता बरती जा रही है। सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर रखी जा रही है।
नेपाल का पानी त्रिशूली नदी के रास्ते गंडक तक पहुंचेगा। इसके बाद बिहार के निचले इलाकों में पानी बढ़ सकता है। अगले 5-6 घंटे अहम बताए गए हैं। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि इन सभी इलाकों में बाढ़ आएगी ही।







