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नेपाल में बालेन शाह के खिलाफ सड़कों पर उतरे Gen Z युवा

विदेश डेस्क : ऋषि राज

काठमांडू: नेपाल की राजधानी काठमांडू में एक बार फिर बड़ी संख्या में युवा सड़कों पर उतर आए हैं। वर्ष 2022 में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में काठमांडू के मेयर बने बालेन शाह को सत्ता तक पहुंचाने में जिस जनरेशन ज़ेड (Gen Z) की अहम भूमिका रही थी, वही युवा अब उनके प्रशासनिक रवैये के खिलाफ खुलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल के दिनों में नगर पालिका पुलिस की कार्रवाई और एक राइड-शेयरिंग चालक की दर्दनाक मौत ने इस विरोध को और तेज कर दिया है। प्रदर्शनकारी प्रशासन पर गरीबों, छोटे दुकानदारों और रोज कमाने-खाने वाले लोगों के साथ कठोर व्यवहार करने का आरोप लगा रहे हैं।

विरोध प्रदर्शन की शुरुआत 25 वर्षीय राइड-शेयरिंग चालक गणेश नेपाली की मौत के बाद हुई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गणेश नेपाली राजधानी काठमांडू में एक ग्राहक का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान नगर पालिका पुलिस ने पार्किंग नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए उनकी मोटरसाइकिल का पहिया लॉक कर दिया और चालान की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस घटना से आहत गणेश नेपाली ने मौके पर ही अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। गंभीर रूप से झुलसने के बाद उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने पूरे नेपाल, विशेषकर युवाओं के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर दिया।

गणेश नेपाली की मौत के बाद सैकड़ों छात्र, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक राजधानी के सिंहदरबार सचिवालय के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर "गरीबों पर अत्याचार बंद करो", "मानवाधिकारों का सम्मान करो" और "गरीबों को न्याय दो" जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नगर पालिका पुलिस लगातार छोटे व्यापारियों, फुटपाथ विक्रेताओं और निम्न आय वर्ग के लोगों को निशाना बना रही है, जबकि उनके पुनर्वास या वैकल्पिक व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।

प्रदर्शन कर रहे युवाओं की प्रमुख मांगों में कथित अवैध गिरफ्तारियों पर रोक, गरीब एवं बेघर परिवारों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था तथा नगर पालिका पुलिस की कार्यशैली की निष्पक्ष जांच शामिल है। उनका आरोप है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर कई गरीब परिवारों को बिना पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था के बेघर किया गया, जिससे सामाजिक असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

बालेन शाह को वर्ष 2022 के स्थानीय चुनावों में युवाओं का व्यापक समर्थन मिला था। उन्हें पारंपरिक राजनीति के विकल्प और बदलाव के प्रतीक के रूप में देखा गया था। मेयर बनने के बाद उन्होंने राजधानी को व्यवस्थित बनाने, अतिक्रमण हटाने, अवैध निर्माण रोकने और शहरी प्रबंधन सुधारने के लिए कई सख्त कदम उठाए। हालांकि इन अभियानों के दौरान कई बार स्थानीय लोगों और नगर पालिका प्रशासन के बीच टकराव की घटनाएं भी सामने आईं, जिसके कारण उनके प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे।

नेपाल के संविधान के अनुसार स्थानीय निकायों को अपनी नगर पालिका पुलिस गठित करने का अधिकार प्राप्त है। इसी आधार पर बालेन शाह के कार्यकाल में "काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी म्यूनिसिपल पुलिस एक्ट 2023" लागू किया गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस कानून में नगर पालिका पुलिस को नागरिकों को हिरासत में लेने या बल प्रयोग करने के व्यापक अधिकार स्पष्ट रूप से नहीं दिए गए हैं। ऐसे में हालिया घटनाओं के बाद पुलिस की भूमिका और अधिकारों को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विरोध केवल एक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि युवाओं की बढ़ती असंतुष्टि का संकेत है। आने वाले दिनों में नेपाल सरकार और काठमांडू महानगर प्रशासन के लिए यह चुनौती होगी कि वे कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए नागरिकों के अधिकारों और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन स्थापित करें। यह घटनाक्रम नेपाल की स्थानीय राजनीति और युवा जनमत की बदलती दिशा का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।