Ad Image
Ad Image
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा हेट स्पीच मामले की आज सुनवाई की || लोकसभा से निलंबित सांसदों पर आसन पर कागज फेंकने का आरोप || लोकसभा से कांग्रेस के 7 और माकपा का 1 सांसद निलंबित || पटना: NEET की छात्रा के रेप और हत्या को लेकर सरकार पर जमकर बरसे तेजस्वी || स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, केशव मौर्य को होना चाहिए यूपी का CM || मतदाता दिवस विशेष: मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा 'मतदान राष्ट्रसेवा' || नितिन नबीन बनें भाजपा के पूर्णकालिक राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. लक्ष्मण ने की घोषणा || दिल्ली को मिली फिर साफ हवा, AQI 220 पर पहुंचा || PM मोदी ने भारतरत्न अटल जी और मालवीय जी की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया || युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म जयंती आज

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

नेशनल हेराल्ड मामले में ED की कार्रवाई पर अदालत ने उठाए सवाल

नेशनल डेस्क, श्रेया पांडेय ।

नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को लेकर अब न्यायपालिका ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। दिल्ली की एक विशेष अदालत ने हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि ED को यह साबित करना होगा कि उसने जो कदम उठाए हैं, वे कानून के दायरे में हैं और उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए किए गए हैं। अदालत ने विशेष रूप से राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ की गई जांच के संदर्भ में एजेंसी से जवाब मांगा है।

यह मामला वर्ष 2012 में शुरू हुआ था, जब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस पार्टी ने अपने अख़बार ‘नेशनल हेराल्ड’ की संपत्ति को अवैध तरीके से एक निजी कंपनी ‘यंग इंडिया’ के माध्यम से अपने शीर्ष नेताओं के नियंत्रण में लेने का प्रयास किया। इस कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की बड़ी हिस्सेदारी है। आरोप के अनुसार, इस सौदे के जरिए कांग्रेस नेताओं ने करीब 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति पर अधिकार पाने की कोशिश की।

 

प्रवर्तन निदेशालय ने इस आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच शुरू की और दोनों नेताओं से कई बार पूछताछ की। ED का कहना है कि यह सौदा वित्तीय अनियमितताओं से भरा हुआ था और इसमें सार्वजनिक पैसे का दुरुपयोग हुआ है। लेकिन कांग्रेस पार्टी लगातार यह दावा करती रही है कि यह मामला पूरी तरह से राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है।

 

अब अदालत ने कहा है कि ED को यह स्पष्ट करना होगा कि वह किस आधार पर इस मामले को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला मान रही है, जब तक कि कोई प्राथमिक अपराध (predicate offence) सिद्ध नहीं हो जाता। न्यायालय ने एजेंसी की प्रक्रिया और सबूतों की वैधता पर भी सवाल उठाया। यह बयान विपक्ष के लिए राहत की तरह देखा जा रहा है, जो पहले से ही इसे राजनीतिक उत्पीड़न का मामला बता रहा है।

 

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक हलकों में बहस को जन्म दिया है। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र और विपक्ष की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है, वहीं सत्तारूढ़ पार्टी इस मुद्दे को कानून की कार्रवाई के रूप में देख रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ED अदालत को अपने कदमों को सही ठहराने के लिए क्या ठोस प्रमाण देती है।

कुल मिलाकर, नेशनल हेराल्ड मामला केवल एक कानूनी विवाद नहीं बल्कि एक बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है, जिसमें कानून, राजनीति और न्यायपालिका की भूमिका के बीच एक नाजुक संतुलन बनाना जरूरी हो गया है। आगामी सुनवाई में यह स्पष्ट हो पाएगा कि अदालत ED के तर्कों को किस हद तक स्वीकार करती है या उन्हें खारिज करती है।