स्टेट डेस्क | रवि कश्यप
पटना: ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम 2026 के विरोध में बुधवार शाम राजधानी पटना के कारगिल चौक पर मशाल जुलूस सह विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन में ट्रांसजेंडर समुदाय के पुरुष, महिला, सामाजिक कार्यकर्ता तथा समुदाय के समर्थन में जुड़े विभिन्न लोग शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि 15 अप्रैल 2014 को माननीय उच्चतम न्यायालय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्वयं स्वीकृत जेंडर पहचान के साथ नागरिक अधिकार प्रदान किए थे, जो समाज के वंचित वर्गों के लिए एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम था। इसके बाद वर्ष 2019 में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों के संरक्षण हेतु कानून लागू किया गया, जिससे समुदाय को मुख्यधारा में आने और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा मार्च माह के अंतिम सप्ताह में पारित ट्रांसजेंडर संशोधन अधिनियम 2026 के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अपनी जेंडर पहचान मेडिकल बोर्ड के समक्ष साबित करने के लिए बाध्य किया गया है, जो उनके मौलिक अधिकारों और गरिमा के खिलाफ है।
वक्ताओं ने कहा कि महिला और पुरुषों की पहचान किसी मेडिकल बोर्ड से प्रमाणित नहीं कराई जाती, ऐसे में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए ऐसी प्रक्रिया अमानवीय और भेदभावपूर्ण है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि अर्धनारीश्वर, मोहिनी, बृहन्नला और शिखंडी जैसे उदाहरण हमारे समाज में विविध जेंडर पहचान की स्वीकृति दर्शाते हैं।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि सरकार किसी योजना के लाभार्थियों को चिन्हित करना चाहती है, तो अन्य प्रशासनिक तरीकों से यह किया जा सकता है, लेकिन जेंडर पहचान को जांच का विषय बनाना उचित नहीं है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विशाल कुमार ने की। इस अवसर पर माला किन्नर, संजना राय, रानी तिवारी, रानी पांडे, राज सिंह, नवीन कुमार, नीरज राज, सिस्टर सिथीया लॉयर, स्वीटी कुमारी, आशु सिंह, पायल कुमारी, जिया कुमारी, शिवांगी सोनी, मुस्कान किन्नर, रितु कुमारी सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे।
आयोजकों के अनुसार, इस विरोध प्रदर्शन में लगभग 300 लोगों ने भाग लिया।






