नेशनल डेस्क, रानी कुमारी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा—
“आप सभी को महर्षि वाल्मीकि जयंती की असीम शुभकामनाएं। उनके सद्विचार भारतीय संस्कृति और विरासत के मूल तत्व रहे हैं, जो हर युग में राष्ट्र को पुष्पित-पल्लवित करते रहेंगे। मानवता के लिए उनके अनमोल संदेश देशवासियों के लिए सदैव पथ-प्रदर्शक बने रहेंगे।”
महर्षि वाल्मीकि को संस्कृत साहित्य का आदिकवि माना जाता है। वे रामायण के रचयिता हैं, जिसमें लगभग 24,000 श्लोक और सात कांड हैं। परंपरा के अनुसार, उनका पूर्व जीवन रत्नाकर नामक डाकू के रूप में बीता था। देवर्षि नारद से मुलाकात के बाद उन्होंने गहन तपस्या की। इतनी गहरी समाधि में थे कि उनके चारों ओर वल्मीक (दीमक की बांबी) बन गए, जिससे उनका नाम वाल्मीकि पड़ा।
एक कथा के अनुसार, जब उन्होंने एक क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को शिकारी द्वारा मारे जाने का दृश्य देखा, तो उनके मुंह से शोक भरा श्लोक निकल पड़ा। यही श्लोक संस्कृत काव्य का पहला श्लोक माना जाता है। भगवान ब्रह्मा के आशीर्वाद से उन्होंने रामायण की रचना की। रामायण में ही उल्लेख है कि वनवास के दौरान श्रीराम उनसे मिले थे और बाद में सीता जी को उनके आश्रम में शरण मिली थी, जहां लव-कुश का जन्म हुआ।
इस वर्ष वाल्मीकि जयंती 26 अक्टूबर को मनाई जा रही है। आश्विन पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर दोपहर करीब 11:55 बजे शुरू हुई और 26 अक्टूबर सुबह करीब 9:41 बजे समाप्त हो रही है। कई राज्यों जैसे हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश में आज सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। स्कूल-कॉलेज भी कई जगह बंद हैं।
चंडीगढ़ प्रशासन ने भी इसे गजटेड हॉलीडे रखा है।
देशभर में वाल्मीकि मंदिरों और आश्रमों में विशेष पूजा-अर्चना, रामायण पाठ, भजन-कीर्तन और शोभा यात्राएं निकाली जा रही हैं। अयोध्या के राम मंदिर में भी इस बार पहली बार महर्षि वाल्मीकि जयंती का भव्य आयोजन हो रहा है, जिसमें सामाजिक समरसता का संदेश देने वाले कार्यक्रम रखे गए हैं। भक्तगण महर्षि की मूर्ति या चित्र को सजाकर जुलूस निकालते हैं, आरती करते हैं और गरीबों को भोजन करवाते हैं।
महर्षि वाल्मीकि का जीवन संदेश आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने सिखाया कि अतीत चाहे कैसा भी हो, सच्ची तपस्या और राम-नाम से जीवन बदला जा सकता है। समानता, करुणा, धर्म और न्याय के उनके विचार भारतीय समाज की नींव हैं। वाल्मीकि समाज समेत पूरे देश के लोग इस दिन उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लेते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने इस अवसर पर पूरे देश में उत्साह बढ़ाया है। उनके शब्दों में महर्षि वाल्मीकि के विचार न सिर्फ भारतीय संस्कृति की नींव हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।







