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बिहार: 22 साल बाद घर-घर होगा वोटर्स लिस्ट का सत्यापन

स्टेट डेस्क, वेरोनिका राय |

बिहार में 22 साल बाद घर-घर होगा वोटर्स लिस्ट का सत्यापन, पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जाएंगे

बिहार में 22 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत होने जा रही है। भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य में चुनावी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से यह बड़ा कदम उठाया है। इस अभियान की शुरुआत 1 जुलाई से होगी, जिसमें बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाता सूची का भौतिक सत्यापन करेंगे। यह प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलेगी, और इसी दिन मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा।

गौरतलब है कि बिहार में पिछली बार विशेष गहन पुनरीक्षण वर्ष 2003 में हुआ था। इसके बाद से मतदाता सूची में समय-समय पर आंशिक सुधार तो होते रहे, लेकिन व्यापक स्तर पर पात्र नागरिकों को जोड़ने और मृत या अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाने का काम नहीं हो सका। हाल के वर्षों में मतदाता सूची में गड़बड़ी, दोहरी प्रविष्टि, फर्जी नाम और विसंगतियों की शिकायतें बढ़ती रही हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग ने निर्णय लिया कि अब एक बार फिर पूरे राज्य में गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया जाएगा ताकि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में हर योग्य नागरिक को मतदान का अधिकार मिल सके और चुनाव प्रक्रिया विश्वसनीय बनी रहे।

इस अभियान के तहत बीएलओ प्रत्येक घर में जाकर वहां रहने वाले नागरिकों की जानकारी लेंगे। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि मतदाता सूची में दर्ज व्यक्ति वहां वास्तव में निवास करता है या नहीं। साथ ही 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा जाएगा। जो लोग अन्यत्र स्थानांतरित हो चुके हैं, मृत हो चुके हैं या किसी अन्य कारण से अयोग्य हैं, उनके नाम सूची से हटाए जाएंगे।

अब तक यह सत्यापन कार्य निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) अपने स्तर से दस्तावेजों के आधार पर करते थे, लेकिन अब बीएलओ के माध्यम से फील्ड वेरिफिकेशन को अनिवार्य कर दिया गया है। सत्यापित दस्तावेजों को आयोग के पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, लेकिन इनकी गोपनीयता को प्राथमिकता दी जाएगी। केवल अधिकृत निर्वाचन अधिकारी ही इन दस्तावेजों को देख सकेंगे।

यदि किसी नागरिक या राजनीतिक दल को मतदाता सूची से संबंधित कोई आपत्ति है—जैसे किसी का नाम गलत तरीके से जोड़ा गया है या किसी पात्र व्यक्ति का नाम छूट गया है—तो वे इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) ऐसी आपत्तियों की जांच करेंगे और आवश्यक दस्तावेजों की पड़ताल के बाद संबंधित ईआरओ को अपनी रिपोर्ट देंगे। अंतिम निर्णय ईआरओ द्वारा ही लिया जाएगा।

हालांकि यदि किसी को ईआरओ का निर्णय स्वीकार नहीं है, तो वह जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत जिला पदाधिकारी या मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष अपील भी कर सकता है।

निर्वाचन आयोग इस बार विशेष रूप से राजनीतिक दलों से अपील कर रहा है कि वे प्रत्येक मतदान केंद्र पर बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) की नियुक्ति करें। बीएलए की भूमिका इस अभियान में महत्वपूर्ण होगी। उनकी भागीदारी से पुनरीक्षण प्रक्रिया अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावशाली बन सकेगी। बीएलए अगर पहले चरण से ही सक्रिय रूप से बीएलओ के साथ कार्य करेंगे, तो दावों, आपत्तियों और अपीलों की संख्या में काफी कमी लाई जा सकेगी।

इसके अलावा, आयोग द्वारा प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को भी इस कार्य में शामिल किया जाएगा ताकि बीएलओ को पर्याप्त सहयोग मिल सके और पूरे राज्य में सुचारू ढंग से पुनरीक्षण कार्य पूरा किया जा सके।

बिहार में 22 साल बाद हो रहे इस विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान से यह उम्मीद की जा रही है कि राज्य की मतदाता सूची और अधिक विश्वसनीय और अद्यतन बनेगी। यह अभियान न केवल मतदाता सूची को सुधारने का माध्यम बनेगा, बल्कि लोकतंत्र की नींव यानी "स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव" को और मजबूत करेगा। आगामी चुनावों के लिहाज से यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है और हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इसमें सक्रिय भागीदारी करे।