स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना ।
- गांधी मैदान में बिहार दिवस के मौके पर अपने विभाग के पैवेलियन का उद्घाटन कर रहे थे ग्रामीण कार्य मंत्री
- कहा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने से पहले बिहार में ग्रामीण सड़कों की लम्बाई थी महज सात हजार किमी
- 21 वर्षों में ग्रामीण सड़कों की लम्बाई 1.20 लाख किमी से भी अधिक हो चुकी हैं
- ग्रामीण सड़कों को दो लेन में तब्दील करने का काम भी जल्द होगा पूरा
- अब ग्रामीणों की एक शिकायत पर 24 से 72 घटे में दुरुस्त हो रही हैं गांव की सड़कें
पटना, ग्रामीण कार्य मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने कहा कि आज बिहार की ग्रामीण सड़कों पर विकास का रथ अपनी पूरी गति के साथ दौड़ रहा है। राज्य की ग्रामीण सड़कों को दो लेन की सड़क में तब्दील किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने ग्रामीण सड़कों की निगरानी का काम भी जनता को सौंप दिया है। ग्रामीण सड़कों से संबंधित समस्याएं जनता से ऑनलाइन मांगी जा रही हैं और उनकी शिकायतों को 24 से 72 घंटे के अंदर दूर किया जा रहा है। ग्रामीण कार्य मंत्री डॉ. अशोक चौधरी रविवार को राजधानी के ऐतिहासिक गांधी मैदान में बिहार दिवस के अवसर पर ग्रामीण कार्य विभाग के पैवेलियन का उद्घाटन कर रहे थे। इस अवसर पर विधान पार्षद संजय सिंह भी उपस्थित थे।
डॉ. अशोक चौधरी ने पैवेलियन का उद्घाटन करते हुए कहा कि अब बिहारी होना दुनिया में सम्मान का विषय बन चुका है। उन्होंने बिहार दिवस मनाने की परंपरा शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही बिहार की गौरवशाली इतिहास और समृद्ध परम्पराओं का उत्सव मनाने के लिए बिहार दिवस की शुरुआत की है। यह वही दिन है जब वर्ष 1912 में बंगाल से बिहार का विभाजन हुआ था। उन्होंने कहा कि यह देश का वही राज्य है जहां से कभी सम्राट अशोक ने अखंड भारत पर राज किया था।
डॉ. चौधरी ने ग्रामीण कार्य विभाग की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए कहा कि जब आज से करीब 21 साल पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तब बिहार में ग्रामीण सड़कों की कुल लम्बाई महज सात हजार किलोमीटर थी। आज बिहार में ग्रामीण सड़कों की लम्बाई बढ़कर एक लाख, बीस हजार किलोमीटर से भी अधिक हो चुकी है। साथ ही, विभाग द्वारा राज्यभर में कुल 2893 ग्रामीण पुलों का भी निर्माण किया गया है। अब ऐसी कोई भी ग्रामीण बसावट नहीं है जो पक्की बारहमासी सड़कों से जुड़ी न हो।
24 घंटे में ठीक हो रही गांव की सड़कें!
उन्होंने कहा कि बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां विकास का रास्ता गांवों से होकर गुजरता है। चकाचक ग्रामीण सड़कों ने न केवल राज्य के कृषि उत्पादन में अपना योगदान दिया है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नए पंख लगे हैं। अब ग्रामीणों की पहुंच से न तो शिक्षण संस्थान दूर हैं और न ही बैंक, बाजार और अस्पताल। ग्रामीण सड़कों से संबंधित शिकायतों की निपटारे के लिए विभाग ने “हमारा बिहार हमारी सड़क” नामक एक मोबाइल एप का निर्माण किया है। जिसपर ग्रामीण सड़कों से सम्बंधित सभी समस्याओं और शिकायतों का निपटारा महज 24 से 72 घंटे के बीच किया जा रहा है।
बदलते बिहार की असली तस्वीर
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विजन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने बिहार की गौरवशाली इतिहास और समृद्ध परम्पराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए हर साल 22 मार्च को बिहार दिवस का उत्सव मनाने की शुरुआत की है। उन्होंने राज्य के लोगों में बिहारी होने का गौरव भरा है। इसके लिए बिहार गान और बिहार गीत की भी रचना की गई है।
गांवों की सड़कों से खुल रहा विकास का रास्ता
ग्रामीण कार्य विभाग के पैवेलियन के उद्घाटन के अवसर पर विभाग के अपर सचिव संजय कुमार, अपर सचिव अभय कुमार झा और अभियंता प्रमुख सह विशेष सचिव निर्माण कुमार के साथ कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।







