स्टेट डेस्क, एन के सिंह।
- रमजान और होली के संगम पर बिहार 'हाई अलर्ट' पर, हुड़दंगियों के लिए जेल और अमनपसंदों के लिए सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम।
पटना: बिहार की पावन धरती इस बार एक अत्यंत दुर्लभ और अद्भुत सांस्कृतिक संगम की साक्षी बनने जा रही है, जहाँ एक ओर फिजाओं में रमजान की मुकद्दस इबादत की गूँज है, तो दूसरी ओर होली के चुलबुले रंगों का उल्लास हिलोरें मार रहा है। इस दोहरे पर्व की संवेदनशीलता और गरिमा को अक्षुण्ण रखने के लिए बिहार का प्रशासनिक अमला पूरी तरह 'एक्शन मोड' में आ चुका है। राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने संयुक्त रूप से कमान संभालते हुए पूरे प्रदेश में 'हाई अलर्ट' घोषित कर दिया है, ताकि आपसी सौहार्द के इस ताने-बाने पर कोई आंच न आने पाए।
सुरक्षा का अभेद्य किला, 20,000 अतिरिक्त जवानों की तैनाती
बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर कोताही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने इस बार मुस्तैदी का ऐसा पैमाना सेट किया है कि राज्य का कोना-कोना एक अभेद्य किले में तब्दील हो गया है। तैयारियों की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभिन्न ट्रेनिंग सेंटरों में प्रशिक्षण ले रहे 20,000 से अधिक प्रशिक्षु जवानों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें सीधे जमीनी मोर्चे पर तैनात कर दिया गया है। इसके साथ ही, सभी जिलों में अत्याधुनिक उपकरणों से लैस दंगा निरोधी दस्ते (Anti-Riot Force) को मुस्तैद रखा गया है। पुलिस लाइनों में लगातार मॉक ड्रिल के जरिए जवानों की धार तेज की जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या आपातकालीन चुनौती का सामना बिजली की तेजी से किया जा सके।
असामाजिक तत्वों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
प्रशासन की रणनीति केवल फोर्स की तैनाती तक सीमित नहीं है, बल्कि वह उपद्रवियों के मंसूबों पर 'प्री-एम्पटिव स्ट्राइक' कर रही है। निरोधात्मक कार्रवाई के तहत बिहार पुलिस ने कानून हाथ में लेने की फिराक में बैठे तत्वों की कमर तोड़नी शुरू कर दी है। डीजीपी विनय कुमार ने कड़े लहजे में साफ किया है कि अब तक राज्य भर में 13,000 से अधिक संदिग्ध लोगों से शांति भंग न करने का बांड भरवाया जा चुका है और यह आंकड़ा जल्द ही 30,000 को पार करने वाला है। एसडीओ कोर्ट में असामाजिक तत्वों के खिलाफ प्रस्तावों की झड़ी लगा दी गई है, जिससे यह स्पष्ट संदेश जा चुका है कि जो भी त्यौहार की मिठास में जहर घोलने की कोशिश करेगा, उसके लिए जेल की सलाखें तैयार हैं।
जमीनी स्तर पर 'जन-भागीदारी' का फॉर्मूला
शांति व्यवस्था को केवल डंडे के जोर पर नहीं, बल्कि जन-संवाद के जरिए मजबूत करने के लिए मुख्य सचिव और डीजीपी ने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को विशेष मंत्र दिया है। प्रशासन ने त्रिस्तरीय संपर्क साधते हुए वार्ड सदस्यों, मुखियाओं और सरपंचों को इस शांति मिशन का सिपाही बनाया है। स्थानीय स्तर पर छोटी से छोटी चिंगारी को शोला बनने से रोकने के लिए विशेष 'कैंप कोर्ट' लगाए जा रहे हैं, जहाँ उपद्रवी तत्वों को चिह्नित कर उनसे तुरंत बांड भरवाया जा रहा है। अधिकारियों को सख्त निर्देश हैं कि वे जनता के बीच रहें और किसी भी विवाद को स्थानीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई के जरिए सुलझाएं।
प्रशासन की अपील, "रंग और इबादत का सम्मान करें"
बिहार पुलिस ने आम जनता से भावुक और जिम्मेदार अपील करते हुए कहा है कि यह त्यौहार हमारे सदियों पुराने भाईचारे और गौरवशाली साझा संस्कृति का प्रतीक है। डीजीपी ने जोर देकर कहा कि जहाँ पुलिस अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से निभा रही है, वहीं समाज का सहयोग सबसे अनिवार्य कड़ी है। नागरिकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने आसपास की हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखें और किसी भी अफवाह या उकसावे में आने के बजाय तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें। आपकी सतर्कता ही बिहार की शांति की सबसे बड़ी ढाल है।
उत्सव में खलल डालने वालों की खैर नहीं
कुल मिलाकर, इस बार बिहार में होली का त्योहार 'सख्ती और सौहार्द' के एक अनूठे मिश्रण के साथ मनाया जाएगा। जहाँ एक तरफ पुलिस के तेवर उपद्रवियों के लिए फौलाद जैसे सख्त हैं, वहीं दूसरी तरफ आम नागरिकों के लिए सुरक्षा का आत्मीय घेरा तैयार है। सरकार और प्रशासन का लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट है— बिहार के आसमान में अबीर-गुलाल जरूर उड़े और मस्जिदों से इबादत की सदाएं भी आएं, लेकिन किसी भी कीमत पर सूबे के अमन-चैन में खलल नहीं पड़ना चाहिए।







