स्टेट डेस्क, आकाश अस्थाना।
सी.सी.डी.सी. के साथ अब संभालेंगे विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर का कार्यभार।
रक्सौल/मुजफ्फरपुर। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू), मुजफ्फरपुर प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए विश्वविद्यालय के कॉलेज विकास परिषद (सी.सी.डी.सी.) प्रो. (डॉ.) रजनीश कुमार गुप्ता को प्रॉक्टर का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है। विश्वविद्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार वे अपने वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ अब विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर के रूप में भी कार्य करेंगे। गौरतलब है कि रजनीश कुमार गुप्ता शहर के लब्धप्रतिष्ठ सभाजसेवी भरत प्रसाद गुप्त के कनिष्ठ सुपुत्र हैं।
विश्वविद्यालय के इस निर्णय को शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक दक्षता एवं परिसर में अनुशासन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद प्रो. (डॉ.) गुप्ता विश्वविद्यालय के विकास कार्यों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था एवं प्रशासनिक नियंत्रण की जिम्मेदारी भी निभाएंगे।
सी.सी.डी.सी. के रूप में उनका दायित्व विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के विकास, शैक्षणिक गतिविधियों के समन्वय तथा उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने से जुड़ा है। वहीं, प्रॉक्टर के रूप में परिसर में अनुशासन बनाए रखना, सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना, कानून-व्यवस्था की निगरानी करना तथा प्रशासनिक समन्वय स्थापित करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल होगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन का विश्वास है कि प्रो. (डॉ.) रजनीश कुमार गुप्ता का प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता एवं कार्यकुशलता दोनों महत्वपूर्ण दायित्वों के सफल निर्वहन में नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
बधाइयों का लगा तांता
प्रॉक्टर का अतिरिक्त प्रभार मिलने पर भारत विकास परिषद, शाखा–रक्सौल के अध्यक्ष रजनीश प्रियदर्शी, सेवा संयोजक सह मीडिया प्रभारी बिमल कुमार सर्राफ, टैक्सटाइल चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता, महासचिव आलोक कुमार श्रीवास्तव, शिवपूजन प्रसाद, नारायण प्रसाद, भैरव गुप्ता, रमेश कुमार, राजकुमार रौनियार, मुरारी गुप्ता, शम्भु प्रसाद चौरसिया, नारायण रुंगटा, प्रभु शंकर प्रसाद, मदन गुप्ता सहित अनेक शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। सभी ने विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी होगी।







