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भारत ने ट्रैकोमा पर दर्ज की ऐतिहासिक जीत, WHO ने किया ‘ट्रैकोमा मुक्त’ देश घोषित

नेशनल डेस्क: वेरोनिका राय, प्राची श्रीवास्तव |

विश्व स्वास्थ्य संगठन की बड़ी घोषणा, आंखों की इस गंभीर बीमारी पर मिली सफलता

भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को ‘ट्रैकोमा मुक्त देश’ घोषित कर दिया है। यह घोषणा एक ऐसे समय में आई है जब देश स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और समुदाय-आधारित उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।

ट्रैकोमा एक संक्रामक नेत्र रोग है जो खराब स्वच्छता और जीवनशैली के कारण फैलता है, और समय पर इलाज नहीं होने पर अंधत्व का कारण बन सकता है। WHO के अनुसार, भारत में अब इस बीमारी का कोई सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट नहीं बचा है।

केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों का फल
स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस सफलता को सामुदायिक जागरूकता, स्वच्छता अभियान, बेहतर प्राथमिक चिकित्सा ढांचे और केंद्र-राज्य के समन्वय का परिणाम बताया है। ‘स्वच्छ भारत अभियान’, ‘राष्ट्रीय अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम’ और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी योजनाओं ने भी इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

स्वास्थ्य मंत्री का बयान
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि को भारत के लिए “एक प्रेरणादायक मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा, “यह न केवल हमारी स्वास्थ्य नीतियों की सफलता है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता का भी प्रमाण है।”

क्या है ट्रैकोमा?
ट्रैकोमा एक जीवाणुजनित संक्रमण है जो मुख्यतः बच्चों में फैलता है। लंबे समय तक संक्रमण रहने पर यह पलकें अंदर की ओर मोड़ देता है, जिससे आंखों की पुतलियों को नुकसान होता है और व्यक्ति धीरे-धीरे दृष्टिहीन हो सकता है। स्वच्छता, स्वच्छ जल और उचित स्वास्थ्य शिक्षा इस रोग की रोकथाम के लिए अहम हैं।

WHO की सराहना
WHO ने भारत की इस उपलब्धि को वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक प्रेरक उदाहरण बताया है और अन्य विकासशील देशों से भी भारत की रणनीति अपनाने की अपील की है।

विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि ट्रैकोमा जैसे अन्य उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोगों (Neglected Tropical Diseases) के खिलाफ भी अभियान को गति देगी।

भारत की यह सफलता न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बल्कि नीति निर्धारकों, समाजसेवियों और आम नागरिकों के लिए भी गर्व की बात है। यह स्पष्ट संकेत है कि यदि सरकार, समाज और चिकित्सा क्षेत्र एकजुट हों, तो कोई भी रोग अपराजेय नहीं होता।