Ad Image
Ad Image
युद्ध समाप्ति पर ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत हुई: राष्ट्रपति ट्रंप || बिहार: विजय कुमार सिन्हा, निशांत कुमार, दिलीप जायसवाल, दीपक प्रकाश समेत 32 ने ली शपथ || बिहार में सम्राट सरकार का विस्तार, 32 मंत्रियों ने ली पद और गोपनीयता की शपथ || वोट चोरी का जिन्न फिर निकला, राहुल गांधी का EC और केंद्र सरकार पर हमला || वियतनामी राष्ट्रपति तो लाम पहुंचे भारत, राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक स्वागत || टैगोर जयंती पर 9 मई को बंगाल में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण की संभावना || केरल में सरकार गठन की कवायद तेज: अजय माकन और मुकुल वासनिक पर्यवेक्षक || असम में बीजेपी जीत के हैट्रिक की ओर, 101 से अधिक पर बढ़त, कांग्रेस 23 पर सिमटी || पांच राज्यों में मतगणना जारी: बंगाल, असम में भाजपा को बढ़त, केरल में कांग्रेस और तमिलनाडु में टीवीके को बढ़त || तमिलनाडु चुनाव: एक्टर विजय की टीवीके ने किया उलटफेर, 109 सीटो पर बढ़त

The argument in favor of using filler text goes something like this: If you use any real content in the Consulting Process anytime you reach.

  • img
  • img
  • img
  • img
  • img
  • img

Get In Touch

भारत ने सत्यजीत रे की विरासत को संरक्षित करने के लिए बांग्लादेश को सहयोग देने की पेशकश की

नेशनल डेस्क, श्रेयांश पराशर |

भारत सरकार ने बांग्लादेश में विख्यात फिल्म निर्माता सत्यजीत रे की पैतृक संपत्ति को संग्रहालय में बदलने के प्रस्ताव पर सहयोग देने की इच्छा जताई है। यह कदम भारतीय सिनेमा की धरोहर को सम्मान देने की दिशा में एक सांस्कृतिक प्रयास माना जा रहा है।
 भारत ने बांग्लादेश के मेमनसिंह ज़िले में प्रसिद्ध फिल्मकार और लेखक सत्यजीत रे की पैतृक संपत्ति को गिराए जाने पर गहरा खेद व्यक्त किया है। यह संपत्ति न केवल सत्यजीत रे से जुड़ी थी, बल्कि उनके दादा उपेंद्र किशोर राय चौधरी, जो एक प्रसिद्ध लेखक और प्रकाशक थे, से भी जुड़ी रही है।

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि भारत इस संपत्ति को संग्रहालय में बदलने के विचार का पूरा समर्थन करता है और इस दिशा में बांग्लादेश सरकार को हर संभव सहयोग देने को तैयार है। भारत ने बांग्लादेश सरकार से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को सहेजा जा सके।

यह संपत्ति भारत और बांग्लादेश के साझा सांस्कृतिक इतिहास का एक अहम प्रतीक है। सत्यजीत रे का जन्म भले ही कोलकाता में हुआ था, लेकिन उनका पारिवारिक जुड़ाव बांग्लादेश से भी गहरा रहा है।

भारत सरकार का यह कदम केवल एक इमारत को बचाने की कोशिश नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक संरक्षण और द्विपक्षीय रिश्तों को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम प्रयास है।

अगर बांग्लादेश सरकार इस प्रस्ताव को मान लेती है, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर बन सकती है।