विदेश डेस्क, ऋषि राज।
बीरगंज: भारत और नेपाल के बीच आर्थिक सहयोग को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से “भारत–नेपाल आर्थिक सहयोग मंच 2026” सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। “साझा समृद्धि के लिए द्विपक्षीय सहयोग को तीव्रता” के मूल नारे के साथ आयोजित इस फोरम ने दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और अवसंरचना विकास में नई संभावनाओं को उजागर किया।
PHD Chamber of Commerce and Industry के अंतर्गत भारत–नेपाल केंद्र ने Confederation of Nepalese Industries (CNI) तथा बारा पर्सा उद्योग संघ (BPUS) के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इसका उद्देश्य विशेष रूप से वीरगंज–रक्सौल जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को विस्तार देना था।कार्यक्रम की अध्यक्षता PHD Chamber of Commerce and Industry, दिल्ली के वरिष्ठ सचिव अतुल कुमार ठाकुर ने की। CNI (मधेश प्रदेश) के अध्यक्ष प्रमोद कुमार साह ने स्वागत संबोधन दिया, जबकि CNI के निदेशक डॉ. घनश्याम ओझा ने औद्योगिक सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
विशिष्ट अतिथि के रूप में नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ (FNCCI) के निवर्तमान अध्यक्ष (मधेश प्रदेश) अशोक टेमानी ने नेपाल–भारत संबंधों को व्यवहारिक रूप देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि “रोटी–बेटी” का संबंध केवल नारा नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे ठोस आर्थिक सहयोग में बदलना आवश्यक है। उन्होंने सीमा पार व्यापार में सुगमता, अवसंरचना सुधार, डिजिटल प्रणाली का विस्तार और सीमा प्रबंधन को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।कार्यक्रम में वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष हरि प्रसाद गौतम और चितवन उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष सुमन श्रेष्ठ ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
भारत के नेपाल स्थित दूतावास के प्रथम सचिव (वाणिज्य) सुमन शेखर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि बीरगंज स्थित भारतीय महावाणिज्यदूत देवी सहाय मीना मुख्य अतिथि रहे। CNI के महानिदेशक घनश्याम ओझा ने द्विपक्षीय निवेश और औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।फोरम में सीमा पार व्यापार, रेमिटेंस, आयात–निर्यात व्यवस्था और अवसंरचना विकास में सहयोग को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने निवेश प्रवाह बढ़ाने, क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने तथा सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।इसके अलावा सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम, सीमावर्ती जिलों में अवसंरचना सुधार, क्लस्टर आधारित आर्थिक क्षेत्र विकास तथा व्यापार सहजीकरण के लिए नीतिगत सुधारों पर भी चर्चा हुई।
फोरम ने निष्कर्ष निकाला कि नेपाल–भारत आर्थिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए औद्योगिक विकास, व्यापार नीतियों के पुनरावलोकन और सड़क, रेल एवं हवाई संपर्क को और अधिक मजबूत करना आवश्यक है। यह कार्यक्रम दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक, प्रभावी और परिणाममुखी आर्थिक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।







