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भूकंप से बचाव की तैयारी: पश्चिम चम्पारण में मॉक ड्रिल, ‘ड्रॉप, कवर और होल्ड’ का दिया गया प्रशिक्षण

लोकल डेस्क, वेरॉनिका राय |

बेतिया | भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने और प्रशासनिक तैयारियों को परखने के उद्देश्य से पश्चिम चम्पारण जिले में 25 और 26 फरवरी को विशेष मॉक ड्रिल (अभ्यास) का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के नेतृत्व में आयोजित इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य लोगों में जागरूकता बढ़ाना, आपदा के समय सही प्रतिक्रिया देना और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था।

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक अभ्यास है और लोगों से अपील की गई कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह या घबराहट से बचें। अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) अनिल कुमार सिन्हा और जिला आपदा प्रबंधन शाखा की प्रभारी पदाधिकारी नगमा तबस्सुम ने नागरिकों से सहयोग करने और इसे आपदा से निपटने की तैयारी के रूप में देखने की अपील की।

दो चरणों में हुआ अभ्यास

मॉक ड्रिल का आयोजन दो चरणों में किया गया। 25 फरवरी को टेबल टॉप एक्सरसाइज के तहत अधिकारियों और संबंधित विभागों के बीच रणनीतिक चर्चा हुई, जबकि 26 फरवरी को जिले के सात चिन्हित स्थलों पर फुल-स्केल फिजिकल मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया।

बेतिया शहर में उत्क्रमित उच्च विद्यालय (शेखौना), राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, समाहरणालय भवन, ऑफिसर कॉलोनी और जूडियो शॉपिंग कॉम्प्लेक्स को ड्रिल स्थल बनाया गया। वहीं बगहा में विनायक पेट्रोल पंप (बगहा-1) और फ्लाईओवर (बगहा-2) पर भी अभ्यास कराया गया।

सायरन बजते ही अपनाई गई ‘ड्रॉप, कवर और होल्ड’ तकनीक

मॉक ड्रिल की शुरुआत चेतावनी सायरन से की गई, जिससे भूकंप आने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। सायरन सुनते ही लोगों को तुरंत “ड्रॉप, कवर और होल्ड” तकनीक अपनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इस तकनीक के तहत लोगों को जमीन पर झुककर बैठना, मजबूत मेज या डेस्क के नीचे शरण लेना और उसे मजबूती से पकड़कर स्थिर रहना सिखाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भूकंप के दौरान चोट लगने की संभावना को काफी हद तक कम करती है।

सुरक्षित निकासी और प्राथमिक उपचार का भी कराया गया अभ्यास

भूकंप के झटके रुकने के बाद लोगों को सुरक्षित और खुले स्थान पर क्रमबद्ध तरीके से निकाला गया। निकासी के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि किसी प्रकार की अफरा-तफरी न हो और सभी लोग निर्धारित मार्ग से बाहर निकलें। इसके साथ ही घायलों को प्राथमिक उपचार देने और एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाने का भी अभ्यास कराया गया।

हवाई अड्डा परिसर बना राहत और समन्वय केंद्र

शहर के हवाई अड्डा परिसर को मुख्य स्टेजिंग एरिया और राहत केंद्र के रूप में विकसित किया गया, जहां से एंबुलेंस, दमकल और बचाव टीमों का समन्वय किया गया। यहां भूकंप पीड़ितों के लिए अस्थायी राहत केंद्र, भोजन और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था का भी अभ्यास किया गया।

13 कोषांगों ने संभाली आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी

जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह के निर्देशानुसार स्वास्थ्य, अग्निशमन, संचार और परिवहन समेत कुल 13 कोषांगों का गठन किया गया, जिन्होंने इस ड्रिल के दौरान अपनी कार्यक्षमता का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास में प्रशासन, पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और आपदा प्रबंधन टीम ने मिलकर बचाव और राहत कार्यों का समन्वित अभ्यास किया।

आपदा के समय बरतने वाली सावधानियों की दी गई जानकारी

अधिकारियों ने लोगों को भूकंप के दौरान घबराने से बचने, लिफ्ट का उपयोग न करने, खिड़कियों और भारी वस्तुओं से दूर रहने तथा खुले स्थान पर जाते समय बिजली के तारों और इमारतों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी।

जागरूकता और तैयारी बढ़ाने में मॉक ड्रिल अहम

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की नियमित मॉक ड्रिल से लोगों में जागरूकता बढ़ती है और आपदा के समय सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। इससे जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रशासन ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम और मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।