लोकल डेस्क, आकाश अस्थाना।
*तीन घंटे की मेहनत से तैयार की सूक्ष्म कलाकृति, मधुरेंद्र ने पत्ते पर लिखा—‘अलविदा क्रांतिवीर नाना पाटेकर’*
*“नन्हे से पत्ते पर बड़ी श्रद्धांजलि: मधुरेंद्र ने 3 सेंटीमीटर में उतारा नाना पाटेकर का चेहरा”*
मोतिहारी। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर है। 75 वर्षीय नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को गोवा स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया। उनके निधन पर फिल्म जगत, राजनीति और कला क्षेत्र से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
इसी बीच बिहार के चर्चित अंतर्राष्ट्रीय सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने अपनी कला के अनूठे अंदाज में नाना पाटेकर को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी है। मधुरेंद्र ने महज करीब 3 सेंटीमीटर के हरे पीपल के पत्ते को अपनी कला का कैनवास बनाकर उस पर नाना पाटेकर की तस्वीर उकेरी। इस सूक्ष्म कलाकृति को तैयार करने में उन्होंने लगभग तीन घंटे तक लगातार मेहनत की।
कलाकृति में नाना पाटेकर का चेहरा बेहद बारीकी से उकेरा गया है। छोटे से हरे पत्ते पर चेहरे की भाव-भंगिमा और पहचान को उभारना इस कलाकृति की खासियत है। कलाकृति के साथ मधुरेंद्र ने भावपूर्ण संदेश “अलविदा क्रांतिवीर नाना पाटेकर” भी अंकित किया है।
पीपल के पत्ते को बनाया श्रद्धांजलि का माध्यम
मधुरेंद्र कुमार प्राकृतिक वस्तुओं को कला का माध्यम बनाने के लिए जाने जाते हैं। इस बार उन्होंने नाना पाटेकर को श्रद्धांजलि देने के लिए किसी बड़े कैनवास या रेत की जगह एक छोटे से हरे पीपल के पत्ते को चुना। इतने छोटे आकार के पत्ते पर किसी व्यक्ति का चेहरा उकेरना बेहद सूक्ष्म और कठिन कार्य माना जाता है।
मधुरेंद्र के अनुसार, नाना पाटेकर भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में रहे हैं जिन्होंने अपने अभिनय, संवाद अदायगी और अलग अंदाज से दर्शकों के बीच विशिष्ट पहचान बनाई। उनके निधन की खबर ने कला और सिनेमा से जुड़े लोगों के साथ-साथ आम दर्शकों को भी भावुक कर दिया है।
‘क्रांतिवीर’ के किरदार को किया याद
नाना पाटेकर की याद में बनाई गई इस कलाकृति में ‘क्रांतिवीर’ शब्द का इस्तेमाल उनके चर्चित फिल्मी किरदार और सिनेमा में उनकी पहचान को याद करते हुए किया गया है। नाना पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में लंबे समय तक काम किया और ‘क्रांतिवीर’, ‘परिंदा’, ‘अग्निसाक्षी’ तथा अन्य फिल्मों में अपने अभिनय के लिए विशेष पहचान बनाई। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्म श्री सहित कई सम्मान मिले थे।
कला के जरिए श्रद्धांजलि देने का अलग अंदाज
मधुरेंद्र कुमार की इस कलाकृति की खास बात इसका आकार है। सामान्य तौर पर श्रद्धांजलि के लिए बड़ी तस्वीर या चित्र बनाए जाते हैं, लेकिन मधुरेंद्र ने अपनी कला को एक छोटे से प्राकृतिक पत्ते तक सीमित कर दिया। लगभग 3 सेंटीमीटर के पत्ते पर नाना पाटेकर की तस्वीर तैयार करने में करीब तीन घंटे का समय लगा।
मधुरेंद्र ने बताया कि यह कलाकृति उनके लिए सिर्फ एक कला-कृति नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा के एक वरिष्ठ कलाकार के प्रति सम्मान और श्रद्धा का भाव है। उन्होंने अपनी कलाकृति के माध्यम से नाना पाटेकर की स्मृतियों को याद करते हुए उन्हें अंतिम नमन किया।
देश ने खोया एक विशिष्ट कलाकार
नाना पाटेकर के निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई लोगों ने शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने उनके अभिनय की विविधता और रचनात्मकता को याद करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।
नाना पाटेकर की आवाज, संवाद बोलने की विशिष्ट शैली और गंभीर अभिनय ने उन्हें भारतीय सिनेमा में अलग पहचान दिलाई। उनके निधन को हिंदी और मराठी सिनेमा के लिए एक बड़ी क्षति के रूप में देखा जा रहा है।
मधुरेंद्र कुमार की यह छोटी-सी मगर बेहद सूक्ष्म कलाकृति इसी भाव को अपने भीतर समेटे हुए है—एक छोटे से पीपल के पत्ते पर बड़ी शख्सियत को याद करने की कोशिश।
कलाकृति पर संदेश:
“अलविदा क्रांतिवीर नाना पाटेकर”







